रणनीति के अनुसार, ऐसे लोगों को भाजपा के साथ लाने के लिए उनसे संपर्क के साथ उन्हें या उनके परिवार के किसी न किसी युवा सदस्य को पार्टी के साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी। भले ही वे भाजपा के सदस्य न बने, लेकिन उन्हें भाजपा के सांगठनिक गतिविधियों में किसी न किसी बहाने लाने का प्रयास होगा।
सूत्रों के अनुसार, ऐसे लोगों के परिवार के किसी सदस्य को पंचायत चुनाव भी लड़ाया जा सकता है। इसी तरह राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर अभी तक भाजपा से दूरी रखने वाली यादव और जाटव जातियों को किसी न किसी तरह से संगठन के साथ लाने की तैयारी की गई है। इसके लिए इन जातियों खासतौर से यादव और जाटव को भी पंचायत चुनाव में भागीदारी देने की योजना है।
दरअसल, भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव चूंकि गांव स्तर पर होते हैं। इन चुनाव के बूथ भी ज्यादा होते हैं। इसलिए अगर इन चुनाव के जरिये बूथों पर भाजपा के समीकरण मजबूत बना लिए जाएं तो पार्टी का जनाधार लंबे समय तक मजबूत हो जाएगा।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पंचायत चुनाव के प्रभारी विजय पाठक कहते भी हैं कि राजनीतिक दल होने के नाते हर दल अपना जमीनी जनाधार मजबूत बनाने की कोशिश करता है। हम अपनी विचारधारा और नीतियों को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। कोई यदि हमारी नीतियों और सिद्धांतों से प्रभावित होकर पार्टी में आना चाहता है तो उसका स्वागत है।