मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत की हैट्रिक की राह की कील कांटे दुरुस्त करने में जुट गई है। पार्टी की सबसे बड़ी सिरदर्दी बड़ी संख्या में विधायकों के खिलाफ नाराजगी है। इसका तोड़ निकालने के लिए पार्टी न सिर्फ जीती हुई सभी सीटों का सर्वे करा रही है, बल्कि विधायकों के खिलाफ गहरी नाराजगी वाली सीटों के लिए कार्यकर्ताओं से बातचीत के आधार पर उम्मीदवारों का पैनल भी तैयार कर रही है।
इस क्रम में पार्टी ने सबसे पहले ब्रज क्षेत्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश को चुना है। इन दोनों क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी 2017 के मुकबाले कम सीटें मिली थीं।
इन दो क्षेत्रों की जीती हुई 140 से अधिक सीटों पर सर्वे का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। इनमें से मौजूदा विधायकों के खिलाफ नाराजगी वाली करीब 80 सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल भी तैयार कर लिया गया है। पैनल स्थानीय कार्यकर्ताओं, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर के पदाधिकारियों की राय के बाद तैयार किया गया है।
सहयोगी दलों की सीटों पर भी है नजर
पार्टी सहयोगी दलों की सीटों का भी सर्वे करा रही है। दरअसल पार्टी आगामी चुनाव से पूर्व सहयोगी दलों की सीटों का भी आकलन करना चाहती है, जिससे जरूरत पड़ने पर सीटों की अदला बदली या सहयोगी दलों की उम्मीदवार के चयन में सहायता की जा सके।
नवंबर में तैयार हो जाएगा पूरा पैनल
पार्टी की योजना नवंबर मध्य तक सभी सीटों पर उम्मीदवार का पैनल तैयार कर लेने की है, जिससे दिसंबर में उम्मीदवारों के चयन सहित चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके। पार्टी के सूत्र ने बताया कि टिकट वितरण में इस बार जीत की गारंटी को ही अंतिम मानक बनाया जाएगा। कौन कितनी बार जीता या संबंधित उम्मीदवार का पार्टी में कद को महत्व नहीं दिया जाएगा।