जातीय जनगणना के पक्ष में आवाज बुलंद करती रही हैं मायावती
बसपा प्रमुख मायावती भी अपने बचे वोट बैंक की रखवाली के लिए गाहे-बगाहे जातीय जनगणना के पक्ष में आवाज बुलंद करती रही हैं। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा नेतृत्व को भी लगने लगा कि यह मुद्दा जनता में असर दिखा रहा है।
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भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी कई बार सदन और उसके बाहर यह कह चुके हैं कि वे जातीय जनगणना के खिलाफ नहीं हैं। एक ऐसे समय में जब पहलगाम आतंकी हमले को लेकर वाक वीरों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है, जातीय जनगणना का फैसला राजनीतिक बहस के केंद्र बिंदु को बदलने का काम भी करेगा।
अपने खिलाफ कोई धारणा बनने देना नहीं चाहती भाजपा
जेएनयू के सेवानिवृत्त शिक्षक और समसामयिक राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. रवि कुमार कहते हैं कि भाजपा की राजनीति का सकारात्मक पक्ष यह है कि वे अपने खिलाफ कोई धारणा बनने देना नहीं चाहती। आम जनता में यह संदेश जा रहा था कि जातीय जनगणना न कराकर भाजपा ओबीसी हितों की अनदेखी कर रही है। इससे पहले कृषि कानूनों को भी भाजपा ने इसी सोच के साथ वापस ले लिया था।