यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा अपनी हारी हुई सीटों पर सहयोगी दलों की ताकत आजमा रही है। भाजपा की ओर से सहयोगी दलों को अब तक दी गई 24 सीटों में से 12 सीटें ऐसी हैं जिन पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार हुई थी।
2017 में भाजपा ने 403 में से 384 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बाकी 19 सीटों पर उसके सहयोगी अपना दल (एस) और सुभासपा ने चुनाव लड़ा था। अपना दल को 11 सीटें मिली थीं, इसमें से अपना दल ने 9 सीटें जीती थी। सुभासपा को 8 सीटें मिली थीं, इसमें उसने 4 सीटें जीती थीं। वहीं, 2022 में भाजपा ने अपना दल और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन किया है। निषाद पार्टी ने 15 सीटों की मांग की है। निषाद पार्टी ने अब तक नौ सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित भी कर दिए हैं। इनमें से मात्र दो सीटें ऐसी हैं जहां 2017 में भाजपा जीती थी, अन्य 7 सीटों पर भाजपा हारी थी।
निषाद पार्टी ने जिन सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं उन पर 2017 के चुनाव में बलिया की बांसडीह सीट से सपा के रामगोविंद चौधरी, जौनपुर की शाहगंज सीट से सपा के शैलेंद्र यादव ललई, महराजगंज के नौतनवां से निर्दलीय अमनमणि त्रिपाठी, भदोही की ज्ञानपुर से निर्दलीय विजय मिश्रा, अंबेडकरनगर की कटेहरी से बसपा के लालजी वर्मा, कुशीनगर के तमकुहीराज से कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू और आजमगढ़ के अतरौलिया से सपा के डॉ. संग्राम सिंह जीते थे। जबकि खड्डा से भाजपा के जटाशंकर त्रिपाठी और जालौन के कालपी से भाजपा के नरेंद्र पाल सिंह विधायक हैं।
अपना दल ने अब तक 15 सीटों के प्रत्याशी घोषित किए हैं। इनमें से 4 सीटों पर भाजपा चुनाव हारी थी। इनमें 2017 में प्रयागराज की प्रतापपुर से बसपा के मो. मुजतबा सिद्दीकी, करछना से सपा के उज्ज्वल रमण सिंह, हंडिया से बसपा के हाकिमलाल बिंद और गाजीपुर की जैदपुर से सुभाष पासी जीते थे। सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ से मौजूदा विधायक चौधरी अमर सिंह, मिर्जापुर की छानबे से मौजूदा विधायक राहुल प्रकाश कोल, प्रतापगढ़ की विश्वनाथगंज और प्रयागराज की सोरांव सीट पहले से अपना दल के पास ही है। चित्रकूट की मानिकपुर, फतेहपुर की बिंदकी, प्रयागराज की बारा, गोरखपुर की चौरी-चौरा, संतकबीर नगर की मेंहदावल, झांसी की मऊरानीपुर और सुल्तानपुर सदर सीट भाजपा के पास थी। भाजपा गठबंधन ने 403 में से 379 सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए हैं। पार्टी हारी हुई कुछ और सीटें सहयोगी दलों को दे सकती है।