कानपुर नगर में 5 सीटें भाजपा को मिली जबकि सपा ने सात सीटें जीत लीं। देर रात 8 सीटों पर सपा आगे चल रही थी और 6 पर भाजपा। बसपा को भी एक सीट हाथ लगी और वह एक पर आगे चल रही थी। गाजियाबाद जैसे शहरी मिजाज की सीट पर भी सपा ने देर शाम तक 3 सीटें जीत ली थीं।
मेरठ में बसपा के 7 जिला पंचायत सदस्य जीते हैं। सपा इससे भी आगे रही। रालोद ने भी यहां 6 सीटों पर बढ़त बना रखी है। खास तौर पर रालोद के सामने भाजपा कई सीटों पर चारों खाने चित हो गई। मेरठ में तो रालोद जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए भी ताल ठोकने की तैयारी में है। हाथरस में सपा समर्थित चार प्रत्याशी जीते जबकि भाजपा के पांच और रालोद के 3 प्रत्याशी जीते हैं।
अलीगढ़ में भी उल्टी गंगा बही। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में भाजपा हार गई। अलीगढ़ में रालोद ने 4 सीटें जीती हैं। फिरोजाबाद में भी सपा समर्थित प्रत्याशी आगे चल रहे थे। भाजपा के कई बड़े चेहरे यहां रेस में पिछड़ गए।
बुलंदशहर में देर शाम तक सिर्फ 6 सीटों का ही परिणाम घोषित किया गया जिनमें दो पर भाजपा और चार पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी थी। हालांकि यहां कांटे की टक्कर चल रही थी। बरेली में भाजपा ने 12 और सपा ने 18 सीटों सीटों पर जीत दर्ज की। बसपा को 8 सीटें मिलीं।
पीलीभीत में सपा चार जबकि भाजपा 3 पर सिमट गई। बदायूं में भाजपा 8 और सपा ने 6 सीटों पर बाजी मारी। गौतमबुद्ध नगर में भाजपा मजबूत स्थिति में रही। आगरा में देर शाम तक भाजपा ने 10 सीटें और सपा ने 5 सीटें जीत ली थीं।
बिजनौर में सपा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। देर रात तक परिणाम प्रशासनिक तौर पर तो घोषित नहीं हुए थे, लेकिन पार्टी पदाधिकारियों के दावे के मुताबिक सपा ने 20 सीटें जीती हैं, भाजपा ने 8 और रालोद ने 4 सीटें जीतने का दावा किया।
बागपत में रालोद का तगड़ा प्रदर्शन सामने आया 8 सीटों पर रालोद ने बढ़त बनाई। चार पर सपा, चार पर भाजपा तथा एक पर बसपा पकड़ बनाए हुए थे। विभिन्न स्थानों पर देर शाम तक भी मतगणना चल रही थी और कई जगह परिणाम आने के बावजूद परिणाम घोषित नहीं किए गए थे।