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दलितों के लिए भाजपा और बसपा में होने जा रही है भरपूर टक्कर

Thu, 13 Aug 2015 02:15 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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दलितों को अपनी जमीन किसी को भी बेचने का अधिकार देने पर घमासान तय हो गया है। बसपा ने विधानमंडल के अगले सत्र में इस संबंध में लाए जाने वाले विधेयक को काला कानून बताते हुए जबर्दस्त विरोध की तैयारी शुरू कर दी है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी नेताओं को इस बारे में दिशानिर्देश दे दिया है। अगले विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के लिए दलितों को अपने पाले में एकजुट करने के लिहाज से यह मुद्दा मुंह मांगी मुराद जैसा है।

प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों कैबिनेट में फैसला किया कि दलित अब किसी को भी अपनी जमीन बेच सकेंगे। वर्तमान में दलितों को अपनी जमीन किसी गैर दलित को बेचने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी पड़ती है।
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जिलाधिकारी उसके पास एक निश्चित क्षेत्रफ ल की जमीन होने पर ही जमीन बेचने की अनुमति देते हैं। सरकार अब इस फैसले को कानूनी रूप देने के लिए विधानमंडल के अगले सत्र में विधेयक लाने की तैयारी में है।

खास बात यह कि कैबिनेट के इस फैसले के करीब एक सप्ताह तक किसी भी दल से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। मगर,दिल्ली में संसद सत्र में व्यस्त होने के बावजूद बसपा सुप्रीमो मायावती तक जैसे ही यह खबर पहुंची, उन्होंने न सिर्फ खुद इस फैसले के खिलाफ बयान जारी किया बल्कि बिना देर लगाए अपने नेताओं को इसके विरोध का संदेश भी दे दिया।

बसपा विधानमंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं कि पार्टी विधानमंडल के आगामी सत्र में इस काले विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी। इससे भूमाफिया और बिल्डरों को दलितों की जमीन जोर-जबर्दस्ती से लिखाने की छूट मिल जाएगी। दलितों के पास पांव रखने की जमीन नहीं रह पाएगी।

बसपा के लिए बड़ा मौका

पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से ही ये विश्लेषण सामने आते रहे हैं कि दलित मतदाता बसपा से टूट रहे हैं। लोकसभा चुनाव और उसके बाद विधानसभा के उपचुनावों के नतीजों को इसका आधार बनाया जाता रहा है।

बसपा सुप्रीमो इन विश्लेषणों का पुरजोर विरोध करती रही हैं लेकिन पार्टी की बेचैनी छिप नहीं पाती। कई दलित नेता पार्टी से बाहर जा चुके हैं। ऐसे में दलितों को अपनी जमीन किसी को भी बेचने का अधिकार देने के सरकारी फैसले ने बसपा को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया है।

अब बसपा सदन में इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाकर दलितों को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि उसके हितों की बात केवल वही करती है। दूसरे दल जब भी मौका मिलता है,उन्हें बर्बाद करने पर उतर आते हैं।

जानकार बताते हैं कि बसपा यदि विधानसभा में सरकार के बहुमत के नाते इस विधेयक को पास करने से नहीं रोक पाती है तो भी इसे विधान परिषद में उसके सहयोग के बिना पास कराना आसान नहीं है। सदस्य संख्या घटने के बावजूद बसपा अब भी वहां सबसे बड़ी पार्टी है।
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जमीन बेचने का हक देने से बिल्डर और भूमाफिया पाएंगे फायदा

भूमाफिया को दलितों की जमीन हड़पने के लिए सरकार रास्ता बना रही है। अभी गुंडों और भूमाफि या को दलितों की जमीन लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। व्यवस्था बदलने से इनके लिए मनमाने तरीके से घर बैठे जमीन लिखाने का रास्ता बन जाएगा। दलितों के पास पांव रखने के लिए भी जमीन नहीं बचेगी।

यह न सिर्फ दलित विरोधी काला कानून बनाने की तैयारी है बल्कि उन्हें उजाड़ने की नाकामयाब कोशिश भी है। बसपा सदन में इसका जबर्दस्त विरोध करेगी।
स्वामी प्रसाद मौर्य,नेता बसपा विधानमंडल दल

पीछे हट सकती है सरकार

प्रदेश कैबिनेट ने चार अगस्त की बैठक में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम,1950 की धारा 157-क में संशोधन के लिए उप्र जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था संशोधन विधेयक 2015 को मंजूरी दी थी।

ऐसे में इसे विधानमंडल के अगले सत्र में पेश होना तय माना जा रहा है। पर,अटकलें ये भी हैं कि बसपा का विरोध देखते हुए सरकार इस फैसले से पीछे हट सकती है। विधानमंडल सत्र का 14 से 21 अगस्त का जो अनंतिम कार्यक्रम जारी किया गया है उसमें इस विधेयक का जिक्र नहीं है।

बसपा ने विधानमंडल सत्र में पार्टी की रणनीति तैयार करने के लिए गुरुवार की शाम सात बजे पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है। इसमें तय होगा कि शुक्रवार से शुरू हो रहे सत्र में सरकार को किस तरह घेरा जाए।
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