लखनऊ। शादी के लिए नाबालिग का अपहरण करने के आरोपी भाइयों धर्मेंद्र और ज्ञानेंद्र को पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार बरनवाल ने बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने बयान दिया था कि घटना के समय वह 17 साल की थी, लेकिन वह स्कूल के समय से ही धर्मेंद्र से प्यार करती थी। इस प्रेम संबंध से पीड़िता के घरवाले नाराज रहते थे।
घटना वाले दिन पीड़िता को उसकी मौसी की शादी में शामिल होने जाना था और उसने इसकी जानकारी पहले ही धर्मेंद्र को देते हुए उसे मिलने के लिए बुलाया था। पीड़िता अपनी मर्जी से शादी करने के लिए धर्मेंद्र के साथ गई थी, लेकिन पुलिस ने रास्ते में पकड़ लिया और नाबालिग होने के कारण उसे माता-पिता को सौंप दिया।
पीड़िता ने कोर्ट में दिए बयान में कहा कि वह जैसे ही बालिग हुई उसने अपनी मर्जी से धर्मेंद्र से शादी करके घर छोड़ दिया था। उसका एक बच्चा भी है। कोर्ट ने आगे कहा कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पाया। अभियोजन के अनुसार वादी ने बीकेटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया था कि उसकी 17 साल की लड़की चार जुलाई 2018 को बीकेटी के अस्ति गांव में रिश्तेदार की शादी में गई थी, जहां से आरोपी धर्मेंद्र, ज्ञानेंद्र और अन्य उसे बहला-फुसला कर भगा ले गए हैं।