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अगर मीटर रीडर नहीं आया तो स्टोर रीडिंग से बढ़ जाएगा आपका बिजली का बिल

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मीटर रीडर की मनमानी से परेशान हो रहे उपभोक्ता। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
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क्या आपका बिजली बिल भी ज्यादा आ रहा है? बिल पर दिमागी कसरत करने के बावजूद आप वो फॉर्मूला नहीं खोज पा रहे, जिस फॉर्मूले से बिल बनाया गया है? परेशान न हों।
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यकीनन आपकी गणित कमजोर नहीं। बस बिलिंग और मीटर रीडर की मनमानियों को समझ जाएं, सारा खेल साफ हो जाएगा। ऐसे तमाम मामले सामने आ रहे हैं जिनमें बिलिंग एजेंसी और मीटर रीडर की मनमानी से उपभोक्ताओं की जेब कट रही है।
बीकेटी खंड के कमलाबाद बढ़ौली निवासी सत्यदेव मिश्रा 70 वर्ष के हैं। उम्र के इस पड़ाव में वो गुणा-गणित के पक्के हैं। पर, सात दिन में कैसे बिजली का बिल 18,259 रुपये बढ़ गया, उसका गणितीय फॉर्मूला वह नहीं तलाश पा रहे हैं।
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सत्यदेव को 28 सितंबर को 6651 रुपये का बिल मिला। वहीं 5 अक्तूबर को दूसरा बिल आया जोकि 25,310 रुपये का था। वह बताते हैं कि उनके घर में छह एलईडी के बल्ब व दो पंखे चले। बहरहाल उन्होंने उपखंड में शिकायत दर्ज कराई है।
रीडर घर आया ही नहीं, बना दिया बिल, स्टोर रीडिंग से लगी चपत
चिनहट खंड के गंगोत्री विहार में रहने वाले संत कुमार सिंह मीटर रीडर की मनमानी से परेशान हैं। वह बताते हैं कि सितंबर में रीडर बिना उनके घर आए 97 यूनिट का बिल बना दिया। अक्तूबर में 1383 यूनिट का बिल बनाया। सितंबर में रीडर के गलत रीडिंग का बिल बनाने से उनके मीटर में जो ज्यादा यूनिट स्टोर रही वह तय सीमा से अधिक होने पर उन्हें ज्यादा बिल चुकाना पड़ा। इससे उन्हें 500 रुपये की चपत लगी।
इस गणित को समझें...
ये सब चूहे-बिल्ली के खेल जैसा...बस शिकार सिर्फ उपभोक्ता होता है
बिजली के बिल को अगर आप गणितीय नियमों से समझेंगे तो निसंदेह आपका सिर चकराएगा। इसे आसान भाषा में समझने के लिए चूहे-बिल्ली के खेल को समझें। थोड़ी सी लापरवाही हुई नहीं, आपने बिल पर दिमाग खपाया नहीं तो आपकी जेब कटनी तय है। संत कुमार सिंह जैसे ढेरों उपभोक्ता हैं जो इस चूहा-बिल्ली के खेल के शिकार हैं। रीडर आता नहीं। आपकी गलती नहीं। एक महीने कम बिल आया। आप खुश हुए। दूसरे महीने जब वह रीडिंग लेने जाता है। इस बार 500 यूनिट रीडिंग के बाद जितनी रीडिंग होगी उसका बिल सर्वाधिक सात रुपये प्रति यूनिट की दर से बना दिया जाएगा। रीडर के नहीं आने का खामियाजा अब आपको ज्यादा दर से बिल चुकाकर भुगतना पड़ा।
लेसा का फायदा...इसलिए मौन
ऐसा पहली बार हो रहा है, ऐसा नहीं। सब बदस्तूर जारी है। बदलाव पर बदलाव हुए, पर लेसा का सिस्टम उपभोक्ता हितैषी नहीं बन सका। सवाल उठता है कि, लेसा एजेंसी पर नकेल क्यों नहीं कसती? इसका एक ही जवाब है-लेसा का राजस्व बढ़ रहा है। उसे अपने राजस्व की चिंता है।
घरेलू बिजली दर रेट प्रति माह यूनिट
यूनिट रुपये
150 5.50
150 6.00
200 6.50
201 से अधिक 7.00
एजेंसी के खिलाफ हो रही कार्रवाई
गलत बिल बनाने वाली एजेंसी व रीडर के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। जिन रीडरों ने गलत बिल बनाए उनकी पहचान हो चुकी है। ऐसे रीडर मध्यांचल निगम की किसी भी एजेंसी में नौकरी नहीं कर पाएंगे।
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- प्रदीप कक्कड़, निदेशक (वाणिज्य) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम
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