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बाहुबलियों की जेल तो बदली पर इन्हें मिली बड़ी 'राहत'

Sun, 02 Apr 2017 02:43 PM IST
सैयद यासिर रजा/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्तार अंसारी व अतीक अहमद - फोटो : amar ujala
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यूपी में सत्ता बदलते ही हर महकमा मुख्यमंत्री के सामने अपने नंबर बढ़ाने में जुट गया है। जेल महकमा भी इसमें पीछे नहीं है। तीन दिन में 30 अपराधियों की जेल बदली जा चुकी है।
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जिन बड़े बदमाशों को इधर-उधर शिफ्ट किया गया है उन पर आरोप है कि वे जेल में रहकर मोबाइल व अन्य माध्यमों से अपराध को बढ़ावा दे रहे थे। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो जैमर वाली जेलों में भी मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे।

मगर अब बिना जैमर वाली जेलों में स्थानांतरित कर जेल प्रशासन ने इन्हें एक तरह से संजीवनी दे दी है। बाहुबली मुख्तार अंसारी अभी तक लखनऊ जेल में बंद थे, जहां जैमर लगा हुआ है। अब उन्हें बांदा जेल भेजा गया है जहां जैमर स्थापित होने में अभी तीन-चार माह का समय लग सकता है।
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इसी तरह अतीक अहमद को इलाहाबाद की नैनी जेल से देवरिया जेल भेजा गया है। वहां अभी जैमर नहीं लगा है और न ही अगली सूची में देवरिया का नाम है।
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अफसर कह रहे जेलों में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं

डेमो पिक
मुख्तार के दोनों शूटरों को भी बिना जैमर वाली जेल में रखा गया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जेल बदलकर इन अपराधियों को सजा दी गई है या फिर उन्हें फायदा पहुंचाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन जेलों में अपराधियों को स्थानांतरित किया गया है वहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिल सकता।

12 जेलों में है जैमर की व्यवस्था
एडीजी मीणा बताते हैं कि प्रदेश में एक आदर्श कारागार और पांच केंद्रीय कारागार समेत कुल 70 कारागार हैं। मोबाइल का इस्तेमाल रोकने के लिए 12 जेलों में जैमर की व्यवस्था की गई है।

इसमें मुजफ्फरनगर, वाराणसी, मिर्जापुर, सुल्तानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, नैनी- इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और गोरखपुर जेल शामिल है।

12 अन्य जेलों में जैमर लगाने का काम चल रहा है। इसमें जिला कारागार अलीगढ़, एटा, मुरादाबाद, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, इटावा, बांदा, मैनपुरी, झांसी, जौनपुर, बलिया और केंद्रीय कारागार बरेली शामिल है।

28 को मिली बिना जैमर वाली जेल

पिछले तीन दिनों में 30 अपराधियों की जेल बदली गई है। इसमें केवल दो ऐसे हैं जिनको ऐसी जेल में लाया गया जिसमें जैमर लगी है।

जाफर अली को गोरखपुर जेल से मुजफ्फरनगर और ज्ञानेश सिंह को बाराबंकी से मिर्जापुर भेजा गया है। बाकी सभी को बिना जैमर वाली जेलों में भेजा गया है।

बसपा विधायक मुख्तार अंसारी, पूर्व सांसद अतीक अहमद, बसपा के पूर्व विधायक शेखर तिवारी, सपा के पूर्व विधायक उस्मानुल्लाह हक, कुख्यात अपराधी यूनुस काला, मनोज ओझा, कृष्णानंद सिंह, आशुतोष सिंह समेत 28 अपराधी ऐसे हैं जिन्हें ऐसी जेलों में रखा गया है जहां मोबाइल का इस्तेमाल आसानी से हो सकता है।
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कई नेटवर्क पर नहीं होता जैमर का असर

जिन जेलों में जैमर लगाए गए हैं वहां भी कुछ खामियां सामने आने लगी हैं। कई मोबाइल नेटवर्क पर जैमर का असर नहीं होता तो कुछ की फ्रिक्वेंसी अपराधियों की मिलीभगत से कम कर दी जाती है ताकि फोन का इस्तेमाल आसानी से हो सके। 4 जी नेटवर्क पर भी जैमर का असर नहीं हो रहा है।

लखनऊ जेल से इस तरह की शिकायत जेल अधिकारियों को मिली है। इसके बाद जैमर की सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनी को इसे दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

...तो बर्खास्त होंगे अधिकारी
जेलों में मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर प्रदेश सरकार के साथ ही कारागार विभाग के एडीजी गोपाल लाल मीणा भी काफी सख्त दिख रहे हैं। उन्होंने सभी जेल अधीक्षकों और जेलरों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी जेल में मोबाइल का इस्तेमाल पाया गया तो वहां के जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया जाएगा और मुकदमा कायम कर उसी जेल में डाल दिया जाएगा।

मीणा का कहना है कि अपराधियों को जिन जेलों में भेजा गया है वहां उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। सजा के लिए इन जेलों में भेजा गया है जहां गर्मी के दिनों में बिना बिजली के रहना पड़ेगा।
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