भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने आरोप लगाया है कि बसपा की ही तरह सपा के बड़े नेताओं से भी नोएडा अथॉरिटी के घोटालेबाज यादव सिंह के नजदीकी रिश्ते हैं।
भ्रष्टाचार पर सपा और बसपा नेताओं में मिलीभगत है। दोनों एक-दूसरे के भ्रष्टाचारियों को बचाने का काम कर रहे हैं। एक सवाल पर उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चुनौती दी कि यादव सिंह को अगर सरकार और सपा नेताओं का संरक्षण नहीं प्राप्त है तो उन्हें इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करनी चाहिए।
वाजपेयी ने कहा कि राजकिशोर सिंह और गायत्री प्रसाद प्रजापति के मामलों से साफ हो चुका है कि सपा सरकार के मंत्री भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले भी हो सकते हैं। वाजपेयी मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
प्रदेश अध्यक्ष ने विंध्याचल में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा ने भ्रष्टाचार को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का फैसला किया है। यादव सिंह के खिलाफ हो रही जांच में आयकर विभाग व केंद्रीय एजेंसियों के पैर पीछे खींचने या रक्षात्मक होने का सवाल ही नहीं है।
ये घटनाएं बताती हैं यादव सिंह से रिश्ते का सच
अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी कई घटनाएं हैं जो यादव सिंह और सपा नेताओं के रिश्तों को साबित करती हैं। यादव सिंह के खिलाफ पहले रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ था, पर वह इंटरपोल को नहीं मिला। सपा सरकार चुप्पी साधे बैठी रही।
इसके लगभग एक साल बाद सरकार ने उसे तीन-तीन प्राधिकरणों की जिम्मेदारी सौंप दी। यही नहीं, यादव सिंह के खिलाफ बैठाई गई सीबी-सीआईडी जांच रिपोर्ट में उसे निर्दोष साबित कर दिया गया।
वाजपेयी ने सवाल उठाया कि वह रिपोर्ट अगर सही थी तो फिर अब हो रही जांच में अनियमितताएं कैसे सामने आ रही हैं। जाहिर है, सपा सरकार ने बसपा से मिलीभगत के चलते यादव सिंह को संरक्षण दिया।
अपने आप गिरेगी अखिलेश सरकार : वाजपेयी ने कहा कि भाजपा न दलबदल कराएगी और प्रदेश सरकार के खिलाफ अनुच्छेद 360 का उपयोग करेगी। जैसी स्थितियां बनती जा रही हैं, उनसे तय है कि यह सरकार अपनी अंतर्कलह व खींचतान से ही गिर जाएगी।
किसानों को बोनस पर गलत बयानी
वाजपेयी ने कहा कि किसानों को बोनस पर प्रदेश सरकार गलत बयानी कर रही है। इस बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बताया कि केंद्र ने प्रदेश सरकार से कहा था कि सूबे की जरूरत भर का धान खरीदने के लिए ही वह बोनस देगी।
उससे ज्यादा खरीद पर राज्य सरकार व्यवस्था करे, लेकिन प्रदेश सरकार ने इसको लेकर भ्रम फैला दिया।