फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंटर कॉलेज के शिक्षकों पर दिया गया बड़ा आदेश

Thu, 16 Jul 2015 02:12 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला,लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य सरकार इंटर कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए रखे गए अतिथि विषय विशेषज्ञों को स्थाई शिक्षक नहीं बनाएगी। हाईकोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इनके मामले का परीक्षण करते हुए निस्तारित कर दिया है। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
विज्ञापन


इसमें कहा गया है कि विषय विशेषज्ञों को शिक्षक पद पर समायोजित करते हुए वेतन देना औचित्यपूर्ण नहीं है। इसलिए इस प्रकरण को निस्तारित किया जाता है। प्रदेश के 892 इंटर कॉलेजों में 2169 विषय विशेषज्ञ छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा दे रहे हैं।

व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए रखे गए विषय विशेषज्ञों ने पूर्णकालिक शिक्षक बनाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर कर रखा है। हाईकोर्ट ने शासन स्तर पर इस मामले का निस्तारण करने का आदेश राज्य सरकार को दिया था। शासन ने इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से प्रस्ताव मांगा था।
विज्ञापन


निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश व हरियाणा में विषय विशेषज्ञों को समायोजित करने के संबंध में अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर प्रस्ताव भेजा। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने निदेशालय व शासन के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें इन्हें शिक्षक बनाए जाने के लिए पात्र नहीं पाया गया।

विशेषज्ञों को रखते समय इनकी योग्यता का निर्धारण नहीं

शासनादेश में कहा गया है कि विषय विशेषज्ञों को रखते समय इनकी योग्यता का निर्धारण नहीं किया गया। शासन ने 20 साल बाद व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वर्ष 2011 में शैक्षिक योग्यता का निर्धारण किया।

इन्हें समायोजित करने के लिए तुलनात्मक परीक्षण पर हिमाचल व हरियाणा की स्थिति यहां से भिन्न पाई गई। यूपी में विषय विशेषज्ञों की संख्या 2169 है,जबकि अन्य राज्यों में काफी कम। प्रदेश में इनके चयन की नियमित प्रक्रिया नहीं थी और न ही निर्धारित अर्हता।

इन्हें व्याख्यान के हिसाब से मानदेय दिया जा रहा है, इसलिए धन की व्यवस्था आयोजनागत मद से की जाती है। इनकी नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा के लिए बने नियमों के आधार पर नहीं की गई, इसलिए इन्हें शिक्षक बनाया जाना नियमों के परिधि में नहीं है।

इसे बनाया गया आधार
इंटर कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए अतिथि विशेषज्ञों को मानदेय के आधार पर रखा गया। इसलिए स्थाई रूप से पद सृजन की व्यवस्था नहीं की गई और न ही स्थाई रूप से पद सृजित किया गया। इसके चलते न तो चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई और न ही इनकी सेवा शर्तों का निर्धारण किया गया।
विज्ञापन

लोक सेवा आयोग करता है भर्ती

राजकीय इंटर कॉलेजों में सहायक अध्यापक के पदों पर भर्ती का अधिकार मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के पास है तथा प्रवक्ता की भर्ती उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग करता है। सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में भर्ती का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पास है। सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में 50 फीसदी पद सीधी भर्ती और 50 फीसदी पदोन्नति के हैं।

कब रखे गए विषय विशेषज्ञ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वर्ष 1989-90 में इंटर कॉलेजों में केंद्र सरकार के सहयोग से व्यावसायिक शिक्षा योजना शुरू की गई। इसमें छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए संविदा के आधार पर अतिथि विषय विशेषज्ञों को रखा गया।

हाईस्कूल स्तर पर 200 रुपये प्रति व्याख्यान और माह में अधिकतम 8000 तथा इंटरमीडिएट के लिए प्रति व्याख्यान 300 और माह में अधिकतम 10,000 रुपये मानदेय दिया जाने लगा।

व्यावसायिक शिक्षा पर खर्च होने वाली कुल राशि का 75 प्रतिशत केंद्र देता था और 25 प्रतिशत राज्य। केंद्र ने 2003-04 में इस योजना के लिए पैसे देना बंद कर दिया। राज्य सरकार तब से सारा खर्च स्वयं उठा रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें