सरकार ने यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण नीति जारी कर दी है। केंद्र निर्धारण नीति में कुछ भी नया नहीं है। पुराने पैटर्न पर केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा। नकल रोकने के लिए इस बार न तो वीडियो कैमरे की अनिवार्यता की गई है और न ही ऑनलाइन केंद्र निर्धारण की बात कही गई है।
केंद्र निर्धारण के लिए पूर्व की तरह राजकीय, सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के बाद वित्तविहीन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार ने बुधवार को केंद्र निर्धारण नीति जारी कर दी।
बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण तय अवधि के अंदर किया जाएगा मंडलीय समिति से मंजूरी के बाद इसमें किसी तरह का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। संस्थागत व व्यक्तिगत परीक्षार्थियों का केंद्र पांच से आठ किमी के अंदर बनाए जाएंगे। विशेष परिस्थितियों में हाईस्कूल का आठ किमी व इंटरमीडिएट का 12 किमी किया जा सकता है।
छात्राओं के लिए स्वकेंद्र की व्यवस्था रहेगी। स्वकेंद्र की व्यवस्था न होने पर पांच किमी के अंदर परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। एक स्कूल के परीक्षार्थियों के लिए अलग-अलग सेंटर नहीं बनाया जाएगा। परीक्षा फॉर्म भरने वाले स्कूलों में प्राइवेट छात्रों का सेंटर नहीं बनाया जाएगा, लेकिन छात्राओं को स्वकेंद्र की सुविधा दी जाएगी।
निशक्त व दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं को स्वकेंद्र की व्यवस्था दी जाएगी। विगत तीन वर्षों की परीक्षा के दौरान गड़बड़ी करने वाले स्कूलों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। जिन स्कूलों में प्रबंधकीय व प्रधानाचार्य विवाद है उसे भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा।