चुनाव में प्रदेश सरकार के चार मंत्री सत्यदेव पचौरी, मुकुट बिहारी वर्मा, डॉ. एसपी सिंह बघेल और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी खुद चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए 23 मई को न सिर्फ इनकी जीत-हार का नतीजा आएगा बल्कि इससे मौजूदा पद व कद का भी फैसला हो जाएगा।
यदि ये जीत जाते हैं, तो इनके स्थान पर नए लोगों को मौका मिलेगा। जाहिर है कि उन विधायकों को भी मौका दिया जा सकता है, जिनके इलाके में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा है। अगर नतीजा उन संभावनाओं के इर्द-गिर्द न रहा, जैसा कि उम्मीद की जा रही है तो परिणाम इसके उलट भी हो सकते हैं। इनके मौजूदा कद व पद पर संकट छा सकता है।
चुनाव नतीजे सिर्फ इन्हीं चार मंत्रियों का भविष्य तय नहीं करने जा रहे हैं बल्कि उन मंत्रियों का भी भविष्य तय करने वाले हैं, जिन्हें चुनाव के मद्देनजर लोकसभा के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभारी बनाकर तैनात किया गया था। प्रभार वाले क्षेत्रों का नतीजा इनके रणकौशल और लोगों से संपर्क व संवाद का प्रमाण भी देगा।
जाहिर है कि इनके आगे की राह का दारोमदार 23 मई को आने वाले नतीजों पर निर्भर करेगा। सिर्फ इनका ही नहीं बल्कि उन लोगों के भविष्य का फैसला भी चुनाव के नतीजों में छिपा है, जिन्हें चुनाव आचार संहिता लगने से ठीक पहले निगमों, बोर्डों और आयोगों में बैठाकर उन्हें सत्ता सुख में हिस्सेदारी देने की कोशिश की गई थी।
लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद संगठन से सरकार तक फेरबदल तय है। इसकी आहट सुभासपा के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर की बर्खास्तगी के साथ सुनाई देने लगी है। नतीजे मंत्रिमंडल फेरबदल में मंत्री बनने का सपना संजोये कई विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों की उम्मीदों को भी झटका दे सकते हैं।
जाहिर है कि अब मंत्रिमंडल में शामिल करने या न करने के फैसले में
लोकसभा चुनाव के नतीजे और संबंधित चेहरे की क्षमता का भी आकलन होगा।