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पुलिस का दोहरा मापदंड: ‘माननीय’ को बचाते रहे और 185 आरोपियों को शिकायत मिलते ही किया अंदर

Sun, 15 Apr 2018 11:49 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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कुलदीप सिंह सेंगर - फोटो : amar ujala
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उन्नाव गैंगरेप के मामले में विधायक कुलदीप सेंगर को आरोपों से घिरने के बावजूद बचाया जाता रहा। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने से बचती रही। पर, कानून सबके लिए सेंगर जैसा नहीं है।

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लखनऊ की बात करें तो यहां 185 ऐसे मामले हैं जिन पर दुष्कर्म का आरोप लगते ही पुलिस ने दबोच लिया। पीड़िता का मेडिकल कराया और आरोपी को जेल भेज दिया। पर, इन मामलों में पुलिस की जांचें जारी हैं। लिहाजा अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल नहीं किए जा सके।

उन्नाव गैंगरेप मामले की शिकायत मिलने के दस माह बाद भी आरोपी विधायक पर पुलिस मेहरबान रही। डीजीपी ने तो आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर को ‘माननीय’ बताया और गिरफ्तार न किए जाने की वजहें भी गिना दीं।
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कानून के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि आरोपी को सुबूतों से छेड़छाड़ का मौका न मिले। पर, सवाल उठता है कि पुलिस के लिए कानून का पालन कराने की प्रक्रिया अलग-अलग क्यों? या कहें भेदभाव क्यों?

उन्नाव मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस के रवैये और उसकी भूमिका पर सवाल उठाए। अदालत के सख्त रुख के बाद हालांकि सीबीआई ने पहले हिरासत और बाद में सेंगर की गिरफ्तारी की।

यहां तो परिवार को यह भी नहीं पता आरोप किसने लगाया

लखनऊ जिला जेल में बंद 185 लोगों को इंतजार है कि पुलिस उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करे और वे अदालत में जाकर अपना पक्ष रख सकें। या अपनी बेगुनाही के बारे में बता सकें।

पहली अप्रैल को पकड़े गए ठाकुरगंज के सलीम के बेटे गुफरान ने बताया जेल में बंद अब्बू को अब तक नहीं पता है कि दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला कौन है? एक माह से जेल में बंद मवइया के विनोद के परिवारीजनों का कहना है कि उन्हें दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी पुलिस से तब मिली जब विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया।

फैक्ट फाइल
लखनऊ जिला जेल में दुष्कर्म के कुल बंदी- 535
आरोप पत्र दाखिल- 350
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नियम तो यही है पुलिस तत्काल करे कार्रवाई

दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म जैसी गंभीर मामलों में स्पष्ट नियम हैं कि एफआईआर तत्काल दर्ज हो और पुलिस कार्रवाई भी तुरंत अमल में लाई जाए। जिससे महिला के प्रति अपराध के आरोपी को सुबूतों से छेड़छाड़ का मौका न मिले। अगर पुलिस जांच में आरोप झूठे मिलें तो भी आरोपी से एक बार पूछताछ तो जरूर की जानी चाहिए।
अनिल प्रताप सिंह, पूर्व अध्यक्ष लखनऊ बार एसोसिएशन

जेल में दुष्कर्म मामलों के कुल 535 बंदी हैं जिनमें लगभग साढ़े तीन सौ की चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, लिहाजा उनको अदालत में तय तारीख पर पहुंचाया जाता है।
हरबंश पांडेय, डिप्टी जेलर लखनऊ जिला जेल
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