भातखंडे जयंती संगीत समारोह की तीसरी शाम वादन प्रस्तुतियों के नाम रही।
सामूहिक प्रस्तुतियों के बाद एक के बाद एक आती वायलिन और उसके बाद तबले की
तिनक तिन धा.. लोगों को मदमस्त करती रही।
गोमतीनगर के संत गाडगेजी
प्रेक्षागृह में चल रहे जयंती समारोह की अंतिम शाम की प्रस्तुति की शुरुआत
भी भातखंडे कृति से हुई।
विनीत पवैया के
निर्देशन में रवि प्रकाश राय, शिवम मिश्रा के दल ने भातखंडे कृति की शुरुआत
दर्जन भर से अधिक कलाकारों ने राग हमीर छोटा ख्याल में गणपति वंदना से की।
18 मिनट की सामूहिक प्रस्तुति में दल ने तराना भी सुनाया। तबले पर उमेश
चंद्र वर्मा, अरुण कुमार ताल्लुकेदार, सारंगी पर विनोद कुमार मिश्रा,
हारमोनियम पर महेश्वर दयाल नागर ने संगत दी।
इसके बाद मंच पर आई डॉ. संगीता
शंकर ने रागों से समां बांधा। राग श्याम कल्याण विलंबित लय ताल में
प्रस्तुतियों के बाद उन्होंने लय ताल, अड़ा चौताला मध्य ताल और द्रुत ताल
पर लोगों को बांधा।
ठुमरी की बंदिश भी सुनाई। उन्हें तबले पर संगत वाराणसी
के पुंडलिक कृष्ण भागवत ने दी। समारोह की अंतिम और खास
प्रस्तुति पं. विभव का तबला वादन रहा।
तबले में तीन ताल के बाद उन्होंने
लखनऊ घराने की खास प्रस्तुतियां दी। हबीबुद्दीन खां की कृतियों पर खूब
तालियां बजी। अंतिम शाम की अतिथि वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन रहीं।