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शुभ काल में अशुभ सौदे के चक्कर में न पड़ें

Wed, 09 Oct 2013 02:36 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
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नवरात्र और इसके बाद के शुभकाल में जमीन का सौदा कहीं आपके लिए अशुभ साबित न हो जाए। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
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शहर में सस्ते प्लॉट और किस्तों पर प्लॉट देने के लिए अनेक कंपनियां कुकरमुत्ते की तरह उग आईं हैं। इसमें लोगों के ठगे जाने की आशंका है।

अनेक ऐसी कंपनियां हैं, जिनका एलडीए से कोई अप्रूवल नहीं है और वे प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन का सौदा कर रही हैं।

सवाल यह है कि जब कोई कंपनी प्लाट दे रही है तो वह लोगों को कब्जा क्यों नहीं दे रही है। दरअसल ऐसी भी कंपनियां हैं, जिनके पास भूमि ही नहीं है।

वह भी लोगों से 200, 300 से लेकर 600 रुपए वर्ग फीट की बुकिंग कर के धन जमा कर रही हैं। जबकि, भविष्य ये भी मैपल्स जैसा ही कोई गुल खिलाएं, इसकी बड़ी गुंजाइश बनी हुई है।

शहर में सड़कों पर इन दिनों सबसे अधिक विज्ञापन रीयल एस्टेट कंपनियों के दिख रहे हैं। करीब तीन दर्जन नई कंपनियां बाजार में उतर आईं हैं।

जबकि,एलडीए से अप्रूव वही पुरानी कंपनियां हैं। इनमें से अधिकांश प्राधिकरण के पुनरीक्षित क्षेत्र और उसके बाहर जमीन होने का वादा कर के आवंटियों को आकर्षित कर रही हैं।
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नियम के मुताबिक, अगर प्लॉट दिया जा रहा है,तो उस भूमि का लेआउट पास करा के और वाह्य विकास कर के तत्काल प्लॉट पर कब्जा दे दिया जाए।

ऐसा न कर के आवंटियों से किस्तों में भुगतान लिया जा रहा है। जमीन कब मिलेगी, इसका कोई पता नहीं है।

ऐसे बचे अवैध कॉलोनाइजरों से
अवैध कॉलोनाइजर से बचने के लिए कुछ खास बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। सबसे पहले कॉलोनाइजर जहां स्कीम लाया है, उस गांव का नाम जान लें।

देख लें कि यह गांव कहीं एलडीए के क्षेत्र या पुनरीक्षित क्षेत्र में तो नहीं है। अगर है तो क्या कॉलोनी का लेआउट प्राधिकरण ने पास किया है। प्राधिकरण की वेबसाइट पर सभी हाइटेक और इंटीग्रेटड
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टाउनशिप का जिक्र है। अधिक जानकारी प्राधिकरण के नगर नियोजन विभाग से मिल जाएगा। जिस जमीन को कॉलोनाइजर अपना बता रहे हैं,उसके बारे में तहसील से जानकारी करें।
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