राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में चयन के बाद सुगंध पांडेय को भले ही बधाइयां मिलीं लेकिन वह घर वालों को बिना बताए इस परीक्षा में शामिल हुई थी। सुगंध ने परिणाम घोषित होने के काफी देर बाद देर रात किसी प्रकार अपने भाई को इसकी सूचना दी। सुगंध कहती हैं कि उसके परिवारीजन नहीं चाहते हैं कि वह रंगमंच करें।
वे मेरे एनएसडी जाने को लेकर और नाटकों को अपना कैरियर बनाने को लेकर भी बहुत सहमत नहीं हैं।पिछले सात वर्षों से लखनऊ में रहकर थिएटर कर रही सुगंध ने ‘अमर उजाला’ को बातचीत में बताया कि उसके पिता सेना में रहे हैं।
सुगंध ने कहा कि मुझे लखनऊ में आकर ही थिएटर के बारे में पता चला। इसके पहले तो थिएटर को मैं पिक्चर हॉल के रूप में ही जानती थी। रंगमंच के साथ ही उसने लखनऊ में कथक का प्रशिक्षण भी लिया है। सुगंध ने साक्षात्कार के दौरान प्रसिद्ध रंगकर्मियों को बिंदास जवाब भी दिए।
उन्होंने कहा कि मैंने बहुत नाटक नहीं पढ़े हैं क्योंकि मुझे किताबें पढ़ने पर नींद आ जाती है। उसने कहा कि पहले जब मुझे नींद नहीं आती थी तो मुझे किताब पढ़ने की सलाह दी गई थी। गौरतलब है कि तीन वर्षों के लिए होने वाले प्रशिक्षण में देश भर से मात्र 26 युवाओं का चयन होता है।