देहदान नेत्रदान कर लखनऊ के इंदिरानगर सेक्टर 14 के कन्हैयालाल पुरोहित (76) अमर हो गए। रेलवे में सहायक अभियंता के पद से रिटायर हुए कन्हैलालाल पुरोहित का सपना था कि जो शरीर देश, प्रदेश, परिवार और समाज के काम आया वो शरीर प्राण त्यागने के बाद मेडिकल स्टूडेंट के काम आ सके।
इलाज के दौरान नौ मई को रात दस बजे एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया। बेटे अनिरुद्ध पुरोहित ने पिता की अंतिम इच्छा केजीएमयू के एनाटॉमी विभाग में देहदान कर पूरी करायी। देहदान से पहले कन्हैयालाल पुरोहित का नेत्रदान भी कराया गया जिनकी आंखों से दो लोगों की दुनिया रोशन होगी।