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सलाम इन कोरोना वॉरियर्स को: कोई बच्चे को बुखार में तड़पता छोड़ पहुंचा वार्ड तो कोई भाई को

Wed, 05 May 2021 04:01 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

वो वार्ड में पहुंचने के बाद यहां भर्ती सभी मरीजों को अपना परिवार समझकर इलाज में जुट जाते हैं। किट पहनने के बाद उन्हें एक पल की फुर्सत नहीं रहती है। हालत यह है कि परिवार में किसी का बच्चा बीमार है तो किसी का भाई, जिसके बाद भी वे फोन से उसका हालचाल लेने में खुद को अच्छा महसूस करते हैं।
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एसजीपीजीआई की आईसीयू में मौजूद नर्सिंग कर्मी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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एसजीपीजीआई के कोविड वार्ड में ड्यूटी करने वाले नर्सिंग कर्मियों की स्थिति भी अजीब हो गई है। एक तरफ परिवार के लोग वायरस की चपेट में है तो दूसरी तरफ उन्हें अति गंभीर मरीजों की सेवा करनी है। वे बताते हैं कि वार्ड में पहुंचने के बाद यहां भर्ती सभी मरीजों को अपना परिवार समझकर इलाज में जुट जाते हैं। किट पहनने के बाद उन्हें एक पल की फुर्सत नहीं रहती है। हालत यह है कि परिवार में किसी का बच्चा बीमार है तो किसी का भाई, जिसके बाद भी वे फोन से उसका हालचाल लेने में खुद को अच्छा महसूस करते हैं।

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वार्ड में ड्यूटी कर रहे मनोज वर्मा बताते हैं कि उनके परिवार के ज्यादा लोग बीमार है। दो सदस्य कोरोना वायरस की चपेट में हैं। वायरस की चपेट में आने वालों की स्थिति के बारे में भी जानकारी नहीं मिल पा रही है, लेकिन वह इस उम्मीद के साथ वार्ड में भर्ती मरीजों के इलाज में लगे हैं कि यहां के मरीजों के ठीक होने पर उनके भी परिजनों को दूसरे लोग ठीक कर देंगे।

वार्ड में ड्यूटी कर रही पूनम बताती हैं कि बच्चे की तबीयत खराब होने के बाद भी वह पूरी शिद्दत से मरीजों की सेवा में लगी हुई है। गंभीर मरीज को ही अपना माता-पिता मानकर वह सेवा कर रही है। क्योंकि नर्सिंग का उद्देश्य की सेवा है। यहां से ठीक होने वाले लोग जब घर लौटते हैं तो उन्हें ढेर सारा आशीर्वाद देते है। जो लोग अस्पताल से ठीक होकर घर पहुंच जाते हैं तो हमें भी गर्व महसूस होता है कि मेहनत सफल रही।
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नर्सिंग कर्मी पूजा बताती है कि जिस वक्त यह कोर्स किया था उसी वक्त सेवा का संकल्प लिया था। किट पहनकर वार्ड में काम करना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन सेवा के संकल्प को पूरा करने के लिए वह पूरी तत्परता से वार्ड में जुटी हुई है। जब भी किसी मरीज की सांसे अटक ने लगती है तो उसे बचाने का हर संभव प्रयास करती हैं।

आईसीयू मैं कार्यरत प्रवीण बताते हैं कि वार्ड में पहुंचने के बाद पीपी किट पहन लिया जाता है। इसके बाद यह भूल जाते हैं कि यहां कौन भर्ती मरीज उनका परिचित है और कौन अपरिचित। सभी मरीजों की एक ही सेवा भाव से मदद करने में जुट जाते हैं। चिकित्सकों की ओर से दी गई दवाई समय पर देना और मॉनिटरिंग नियमित करते रहना कई बार मुश्किलें भी आती हैं, लेकिन हर मुश्किल को सेवा संकल्प के जरिए पूरा रहते हैं।

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