इस रिसर्च का दूसरा हिस्सा बैंकों द्वारा अपनी वेबसाइटों पर दी जा रही जानकारी का विश्लेषण था। इसमें पता चला कि बैंक और एनबीएफसी जानकारियां छिपा रहे हैं। पेश है कुछ उदाहरण-
- पंजाब नेशनल बैंक यह तक नहीं बताता कि लोन के लिए ग्राहक को कितने दस्तावेज चाहिए होंगे। वह ईएमआई कैलक्यूलेटर भी नहीं देता।
- कोई भी लोन दे रही संस्था यह नहीं बता रही कि पर्सनल लोन का फीस स्ट्रक्चर क्या होगा?
- एचडीबीएफएस और टाटा कैपिटल के अलावा कोई नहीं बताता कि कम से कम कितना कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन लिया जा सकता है?
- इस श्रेणी के लोन का फीस स्ट्रक्चर भी कोई बैंक या एनबीएफसी नहीं बता रही, न ही उनके पास सटीक ईएमआई कैलक्यूलेटर है।