लखनऊ। केनरा बैंक (पहले सिंडिकेट बैंक) के शाखा प्रबंधक अखिलेश कुमार को जालसाजों ने कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया था जिसके चक्कर में उसने अपनी नौकरी तो गवाईं ही, साथ ही जेल भी जाना पड़ा। जालसाजों के चक्कर में पड़कर बैंक मैनेजर ने उपसा (उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी) का 41.76 करोड़ रुपये जालसाजों के खाते में जमा करा दिया था। फर्जीवाड़ा कर दस्तावेज तैयार कराए। जब उपसा ने अपनी रकम वापस मांगी तो इस जालसाजी का खुलासा हुआ।
पुलिस के मुताबिक, उपसा ने अक्तूबर 2019 में 41.76 करोड़ रुपये की एफडी केनरा बैंक (पहले सिंडिकेट बैंक) में कराई थी। उपसा ने जब रकम जमा कराई थी, उस वक्त शाखा प्रबंधक अखिलेश कुमार था। रकम जमा होने के कुछ दिन पहले ही कुछ जालसाज उससे मिले। जालसाजों ने अखिलेश को लालच दिया कि उपसा की रकम को उनके द्वारा बताए गए तरीके से खर्च करने पर मोटा मुनाफा होगा। एक साल में रकम भी वापस कर दी जाएगी। जालसाजों के झांसे में आकर बैंक मैनेजर ने रकम को उपसा के खाते में जमा न कर अपने जालसाज साथियों के खाते में जमा करा दिया था।
कुमार इंटरप्राइजेज के नाम से खोला गया था खाता
जालसाजों ने उसी बैंक में कुमार इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जीवाड़ा कर खाता खुलवाया जिसमें उपसा द्वारा 41.76 करोड़ रुपये एफडी के नाम पर लिए गए लेकिन इस रकम का 37 करोड़ रुपये कुमार इंटरप्राइजेज के खाते में जमा करा दिया गया। वहीं 4.76 करोड़ रुपये की एक एफडी बनाई गई जो उपसा के नाम से थी। कुमार इंटरप्राइजेज के खाते में जमा की गई रकम के बारे में बैंक मैनेजर ने किसी भी उच्चाधिकारी को सूचना नहीं दी थी। यहां तक कि किसका खाता है, किसने खुलवाया इस बात की भी गोपनीयता रखी गई। धीरे-धीरे कर कुमार इंटरप्राइजेज के खाते से रकम निकलती गई जिस पर बैंक मैनेजर अखिलेश कुमार की सहमति थी।
उपसा ने वापस मांगी रकम तो खुला फर्जीवाड़े का खेल
विवेचक के मुताबिक, इस रकम को उपसा ने 2019 अक्तूबर में जमा कराया था। करीब एक साल बाद उपसा ने अपनी रकम वापस मांगी। इस पर अखिलेश कुमार ने टालमटोल शुरू किया। वहीं अखिलेश ने अपने जालसाज साथियों से रकम वापस करने को कहा। जालसाज साथियों ने कुछ रकम वापस की। इसके बाद खाते से सारी रकम निकालकर फरार हो गए। जब उपसा के अधिकारियों का दबाव बढ़ा तो अखिलेश कुमार भी फरार हो गया। इस मामले में केनरा बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार मीणा ने कृष्णानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद से ही अखिलेश की तलाश श्ुारू की गई। अखिलेश को कृष्णानगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।
ठीक एक साल बाद दबोचा गया
इस ठगी के मामले में केनरा बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार मीणा ने 31 जनवरी 2021 को कृष्णानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना शुरू की। मामले की विवेचना एसएसआई नईम अहमद को दी। विवेचना के दौरान कई राज सामने आये। आरोपी अखिलेश फरार चल रहा था। पुलिस ने उसके खिलाफ कुर्की व इनाम घोषित करने की भी कार्रवाई कर ली थी। ठीक एक साल बाद सोमवार यानी 31 जनवरी 2022 को अखिलेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।