नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक एंप्लॉइज (एनसीबीई) और एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ 26 दिसंबर को हड़ताल की घोषणा की है। एसोसिएशन का आरोप है कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों पर दबाव बनाकर बड़े उद्योगपतियों को हजारों करोड़ का लोन देकर फायदा पहुंचा रहे हैं। आम नागरिकों की बचत के इन रुपयों को उद्योगपति नहीं लौटा रहे हैं और केंद्र सरकार वसूली के लिए सख्त कदम भी नहीं उठा रही है।
एसबीआई के मुख्य कार्यालय में कंफेडरेशन के महामंत्री केके सिंह ने कहा कि बैंकों की गिरती आर्थिक स्थिति को छिपाने के लिए छह बैंकों का विलय किया जा रहा है। कई शाखाएं बंद कर दी गई हैं और 2.25 लाख करोड़ का एनपीए एसबीआई का बढ़ चुका है।
बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन के सचिव दिलीप चौहान ने कहा कि बैंकों के विलय से ग्रामीण नागरिकों के लिए ज्यादा मुश्किलें पैदा होंगी, क्योंकि सबसे पहले यहीं की शाखाएं और एटीएम बंद हो रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर कम होंगे।
पदाधिकारी अखिलेश मोहन, पवन कुमार, राजेश शुक्ला और अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि सभी बैंक हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। उधर, शाहनजफ रोड स्थिति बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रवक्ता अनिल तिवारी ने बताया 26 दिसंबर को हजरतगंज में इलाहाबाद बैंक शाखा परिसर में सभा की जाएगी।