लखनऊ/अमेठी। अमेठी की रहने वाली मां एवं बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी एआईएमआईएम के नेता मोहम्मद कादिर खान एवं कांग्रेसी नेता अनूप सिंह पटेल की जमानत अर्जी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश हरेंद्र बहादुर सिंह ने खारिज कर दी है।
दोनों आरोपियों की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्रों का विरोध करते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जेपी सिंह का तर्क था कि इस मामले की रिपोर्ट उप निरीक्षक सज्जाद खान ने गत 17 जुलाई को हजरतगंज थाने पर दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उप निरीक्षक सज्जाद खान अन्य साथी पुलिसकर्मियों के साथ शांति व्यवस्था ड्यूटी में तैनात थे तभी समय करीब 5:30 बजे सायं लोक भवन गेट पर एक महिला व एक लड़की ने अचानक पेट्रोल डालकर स्वयं को आग लगा ली। जिसको वहां पर मौजूद पुलिस बल एवं महिला पुलिसकर्मियों की मदद से तत्काल कंबल आदि डालकर हरसंभव प्रयास करते हुए महिला और लड़की को बचाया गया।
कहा गया है कि लोक भवन के सामने मुख्य मार्ग पर हुई इस घटना से वहां पर खड़े लोगों एवं राहगीरों में भगदड़ मच गई तथा मौके पर अफरातफरी का माहौल व्याप्त हो गया। थाने पर दर्ज रिपोर्ट के अनुसार इलाज के दौरान पता किया गया तो मालूम हुआ कि लड़की गुड़िया उर्फ अफसाना एवं उसकी मां साफिया निवासी जामो थाना जामो जनपद अमेठी की रहने वाली है तथा गांव के अर्जुन, सुनील, राजकरण और राममिलन ने नाली विवाद को लेकर उसे परेशान किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला और उसकी पुत्री ने बताया कि उसने इस मामले को लेकर 9 मई 2020 को विवाद हुआ था जिसका मुकदमा थाने पर लिखा गया था लेकिन थाने द्वारा उसके मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई। उसके बाद वह कई नेताओं से मिली जिसमें अमेठी के एआईएमआईएम नेता कादिर खान जो जिलाध्यक्ष है उन्होंने कहा था कि आत्महत्या करने की कोशिश करो तभी दबाव में कार्रवाई होगी।
कहा गया है कि इसके बाद 4 जुलाई को आसमा व सुल्तान उसे लेकर लखनऊ आए जहां पर कांग्रेस पार्टी के कार्यालय के नेता अनूप पटेल मिले उन्होंने भी विधानभवन के सामने आग लगाकर दबाव डालने वाली बात कही थी।
बहस के दौरान सरकारी वकील का तर्क था कि इस घटना में दोनों महिलाओं का बयान दर्ज किया गया है जिसमें साफिया ने स्पष्ट रूप से कादिर खान और अनूप पटेल के कहने पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या का प्रयास करने की बात को कहा है। अदालत ने कहा है कि मौजूदा समय में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं मृत्यु पूर्व बयान को देखते हुए अभियुक्तों को जमानत पर छोड़ा जाना उचित नहीं है।