बहराइच में अब चलेगा बुलडोजर।
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उधर, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने याचिका का विरोध कर कहा कि अधिकृत निर्माणों को लेकर नोटिस जारी की गई हैं। नोटिसों को पीआईएल के जरिये चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे में यह याचिका खारिज करने लायक है।
बीते रविवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब कर जानकारी पेश करने का आदेश दिया था। साथ ही जिन कथित अवैध निर्माण कर्ताओं के निर्माणों को ढहाने की नोटिस जारी की गई है, उन्हें इनका जवाब दाखिल करने को 15 दिन का समय देकर अफसरों को मामले का निस्तारण करने का आदेश भी दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि निर्माणों के ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते 17 सितंबर को ही संज्ञान लेकर आदेश दिया है। ऐसे में यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तत्परता से पालन नहीं करेगी। कोर्ट के पहले के आदेश के तहत मांगा गया ब्योरा भी बुधवार को राज्य सरकार की ओर से पेश किया गया।