फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बहराइच हिंसा: हाईकोर्ट की दो टूक, कहा- यह विश्वास करने का कारण नहीं कि यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट की नहीं सुनेगी

Thu, 24 Oct 2024 06:49 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Bahraich Violence: बहराइच हिंसा में सरकार द्वारा बुलडोजर चलाए जाने के नोटिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने योगी सरकार पर टिप्पणी की। सरकार को दो दिन समय दिया गया है।
विज्ञापन
बहराइच हिंसा। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बहराइच में मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई हिंसा मामले में ध्वस्तीकरण नोटिसों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका का राज्य सरकार ने विरोध किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई चार नवंबर को नियत की है। सरकार के अधिवक्ता ने याचिका पर आपत्ति जताई कि याची को यह पीआईएल दाखिल करने का हक (लोकस) नहीं है। ऐसे में यह याचिका सुनवाई के लिए ग्रहण करने योग्य नहीं है। इस पर कोर्ट ने सरकार को दो दिन का वक्त इन आपत्तियों को रजिस्ट्री अनुभाग में दाखिल करने को दिया।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स संस्था के पूर्वी उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष के जरिये दाखिल पीआईएल पर दिया। इसमें बहराइच के कथित अतिक्रमणकर्ताओं को इसी 17 अक्तूबर को जारी ध्वस्तीकरण नोटिसों को चुनौती देकर इन्हें रद्द करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया है। साथ ही कहा गया है कि सरकारी अमला समुदाय विशेष के लोगों के निर्माणों को अवैध बताकर ढहाने की कार्रवाई कर रहा है। जबकि वहां पर सड़कों आदि पर कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है।

बहराइच में अब चलेगा बुलडोजर। - फोटो : अमर उजाला।
उधर, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने याचिका का विरोध कर कहा कि अधिकृत निर्माणों को लेकर नोटिस जारी की गई हैं। नोटिसों को पीआईएल के जरिये चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे में यह याचिका खारिज करने लायक है।

बीते रविवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब कर जानकारी पेश करने का आदेश दिया था। साथ ही जिन कथित अवैध निर्माण कर्ताओं के निर्माणों को ढहाने की नोटिस जारी की गई है, उन्हें इनका जवाब दाखिल करने को 15 दिन का समय देकर अफसरों को मामले का निस्तारण करने का आदेश भी दिया था।
विज्ञापन

सरकार पर अविश्वास की वजह नहीं

कोर्ट। - फोटो : ANI
कोर्ट ने कहा था कि निर्माणों के ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते 17 सितंबर को ही संज्ञान लेकर आदेश दिया है। ऐसे में यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तत्परता से पालन नहीं करेगी। कोर्ट के पहले के आदेश के तहत मांगा गया ब्योरा भी बुधवार को राज्य सरकार की ओर से पेश किया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें