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UP: एकेटीयू ने जारी की नई नीति, असाइनमेंट-शोध में बिना अनुमति एआई के प्रयोग पर सख्त कार्रवाई; जानें पूरी डिटेल

Sat, 20 Jun 2026 10:57 AM IST
Akash Dwivedi अक्षय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

प्राविधिक विश्वविद्यालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर नई नीति का मसौदा जारी किया है। पढ़ाई, शोध और असाइनमेंट में इसके प्रयोग के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। बिना अनुमति या जानकारी दिए उपयोग करने पर चेतावनी, अंक कटौती, परिणाम निरस्त होने और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
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एकेटीयू - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने एक तरफ जहां लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं कई जगहों पर चुनौती भी बन रही है। छात्र इसका धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। किंतु पढ़ाई से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों, शोध, थीसिस तैयार करने, असाइनमेंट आदि में इसका असीमित प्रयोग सही नहीं है। इसके मद्देनजर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) एआई नीति लेकर आया है।

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विवि ने इसे सार्वजनिक करते हुए सभी संबंधितों से सुझाव मांगा है। बाद में इसे समाहित करते हुए वह एआई नीति को लागू किया जाएगा। विवि ने कहा है कि इसका उद्देश्य एआई के लाभ को अधिकतम करना और पूर्वाग्रह व अकादमिक कदाचार को रोकना है। एआई नीति में कहा गया है कि छात्र किसी विषय पर विचार मंथन, व्याकरण सुधार व अभ्यास प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का प्रयोग कर सकते हैं।

वहीं, असाइनमेंट के हिस्से ड्राफ्ट करने, प्रोजेक्ट कोड जनरेट करने या डाटा विश्लेषण के लिए एआई प्रयोग की शिक्षक से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, बिना बताए एआई कंटेंट को मूल रूप में जमा करने, परीक्षा में एआई के प्रयोग और विवि की गोपनीय सामग्री या परीक्षा प्रश्नों को सार्वजनिक एआई टूल में डालना वर्जित होगा।
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प्रति कुलपति प्रो. राजीव कुमार ने बताया कि एआई नीति के अनुसार शोध में एआई का प्रयोग हमेशा मानवीय निगरानी और आलोचनात्मक विश्लेषण के साथ होना चाहिए। यदि साहित्य समीक्षा, डाटा विश्लेषण, कोड जनरेशन या पांडुलिपि तैयार करने में एआई टूल्स का प्रयोग किया गया है तो इसका स्पष्ट उल्लेख रिसर्च आउटपुट के मेथड्स या एक्नॉलेजमेंट में करना अनिवार्य होगा। कॉलेजों से सुझाव लेकर इस नीति को और बेहतर बनाया जाएगा।

एआई को लेखक नहीं बना सकते

विवि ने स्पष्ट किया है कि शोध में एआई का प्रयोग डाटा विश्लेषण और साहित्य समीक्षा के लिए किया जा सकता है। किंतु एआई को शोध पत्र के लेखक के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता है। यानी पूरा कंटेंट नहीं दिया जा सकता है। शोध में एआई के प्रयोग का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर और आगे जांच में पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

दंड का भी प्रावधान किया गया

विवि की एआई नीति में दंड का भी प्रावधान किया गया है। इसमें पहली बार पकड़े जाने पर लिखित चेतावनी दी जाएगी। डाटा जालसाजी या परीक्षा में दुरुपयोग के मामले में संबंधित विषय में एफ ग्रेड और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी जबकि व्यवस्थित धोखाधड़ी या थीसिस में बिना बताए प्रयोग करने पर परिणाम और डिग्री रद्द करने का भी प्रावधान होगा।

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