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UP: आयकर पोर्टल में तकनीकी बदलाव, अटके पांच हजार आवेदन और रिटर्न; करोड़ों रुपये की चैरिटी फंडिंग फंसी

Sat, 20 Jun 2026 10:32 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

आयकर पोर्टल में तकनीकी बदलाव के बाद गैर सरकारी संगठनों और चैरिटेबल संस्थाओं को पंजीकरण तथा रिटर्न दाखिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आवेदन प्रक्रिया प्रभावित होने से कर छूट, कॉर्पोरेट सहयोग और विदेशी वित्तीय सहायता से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों ने जल्द समाधान की मांग की है।
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आयकर विभाग के ई फाइलिंग पोर्टल में बदलाव और 12ए व 80जी पंजीकरण प्रक्रियाओं के एकीकरण के बाद देशभर में गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) और धार्मिक व चैरिटेबल ट्रस्टों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फॉर्म सबमिट करने के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आ रहा है लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे सिर्फ यूपी में लगभग पांच हजार आवेदन और रिटर्न प्रक्रिया अटकी हुई है। वहीं, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) व विदेशी फंडिंग भी प्रभावित हो रही है।

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पहले 12ए और 80जी के लिए अलग-अलग आवेदन प्रक्रिया थी। इसे एकीकृत कर दिया गया है। आधिकारिक पोर्टल पर भी यह बदलाव नए फॉर्म सिस्टम के रूप में लागू किया गया है। अब सभी पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया एक ही प्लेटफॉर्म पर हो रही है। 

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और एनजीओ संचालकों का कहना है कि इस बदलाव के बाद पोर्टल की कार्यप्रणाली जटिल हो गई है। कई मामलों में लॉगिन, फॉर्म सबमिशन और वेरिफिकेशन चरणों में तकनीकी त्रुटियां सामने आ रही हैं। इसका सर्वाधिक असर उन संस्थाओं पर पड़ रहा है जो 12ए व 80जी के तहत टैक्स छूट और चंदा पर निर्भर हैं।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर अधिवक्ताओं के संगठन का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे हजारों एनजीओ व ट्रस्ट इस समस्या से प्रभावित हैं। एनजीओ संचालकों का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया बार-बार निरस्त होने से न केवल आवेदन लंबित हैं बल्कि विदेशी व कॉर्पोरेट फंडिंग भी प्रभावित हो रही है क्योंकि 80जी प्रमाणन के बिना डोनेशन पर टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता है।

प्रक्रिया की जटिलताओं को दूर करे सरकार

इनकम टैक्स की डायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमैन विवेक खन्ना का कहना है कि जो लोग पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं, उसकी प्रक्रिया के बारे में सीबीडीटी ने जानकारी नहीं दी है। यदि बोर्ड साफ दिशानिर्देश दे देता तो फॉर्म भरने की समस्या खत्म हो जाती।

जिनका पंजीकरण निरस्त कर दिया है, उन्हें निरस्त न किया जाए। इससे हजारों-करोड़ों रुपये की चैरिटी फंडिंग फंसी है। सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए जटिलताएं जल्द दूर करना चाहिए।

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