खुटेहना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार देर शाम एक महिला ने प्लास्टिक बेबी को जन्म दिया। जन्म के बाद नवजात के रोने पर भी उसके शरीर की खाल फट रही थी। यह देख डॉक्टर हतप्रभ रह गए। साथ ही नवजात के प्लास्टिक बेबी होने की पुष्टि की। उसे आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया।, लेकिन परिवारीजन नवजात व प्रसूता को लेकर घर चले गए।
हुजूरपुर विकास खंड अंतर्गत गोड़हिया गांव निवासी गीता (21) पत्नी ननके चौहान को दोपहर में प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवारीजनों ने पहले घर पर प्रसव कराने की कोशिश की, लेकिन सफल न होने पर वाहन से शाम 5:45 बजे गीता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुटेहना ले गए।
यहां पर 6:18 बजे गीता ने बेटी को जन्म दिया। प्रसव के बाद नवजात की स्थिति देखकर डॉक्टर सकते में आ गए। नवजात के रोने और हाथ-पैर हिलाने पर उसके शरीर की खाल फट रही थी। इस पर डॉक्टरों ने विशेषज्ञों से संपर्क किया तो पता चला कि नवजात प्लास्टिक बेबी है। उसके शरीर की खाल काफी नाजुक है।
इस पर आनन-फानन में जच्चा-बच्चा को मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन परिवारीजन लखनऊ जाने के बजाए घर चले गए। पयागपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एनबी जायसवाल का कहना है कि महिला का प्रसव स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर आशीष शुक्ला ने सफलतापूर्वक कराया।
प्लास्टिक बेबी की पुष्टि होने के बाद उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी गई। लेकिन परिवारीजन डॉक्टर की सलाह को नजरंदाज कर जच्चा-बच्चा को लेकर घर चले गए। ऐसे में स्थिति क्या है, सुबह जांच के बाद ही पता चलेगा।
क्या है प्लास्टिक बेबी
जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि एक लाख बच्चों में एक बच्चे का प्लास्टिक बेबी के रूप में जन्म होता है। गर्भावस्था के दौरान समुचित विकास न होने के चलते नवजात के शारीरिक आवरण की खाल काफी पतली हो जाती है। जो नवजात के हंसने, रोने, अंगड़ाई लेने पर फटने लगती है। खाल के ऊपर से ही शरीर के अंदर से अंश दिखाई देते हैं। वही प्लास्टिक बेबी की स्थिति बनती है।
पूर्व में बहराइच में हो चुका है कोलोडियन बेबी का जन्म
जिले में साल भर पूर्व डिगिहा के निकट एक निजी नर्सिंगहोम में कोलोडियन बेबी का जन्म हुआ था। बेबी के परिवारीजन बलरामपुर के हर्रैया चौधरीडीह गांव के निवासी थे। लगभग पांच माह तक निरंतर इलाज के बाद बेबी की स्थिति में सुधार हो सका था। उसकी हालत अब पहले से बेहतर है। इस मामले में अमेरिका में निजी नर्सिंगहोम के सहयोग से शोध भी हो रहा है।