हमारे हाथों से हर रोज गुजरने वाले नोट और सिक्के बीमारियां फैलाने का माध्यम बन चुके हैं। ये सूक्ष्मजीवी बैक्टीरिया, फंगस और परजीवियों से भरे हैं जो कई बीमारियों की वजह बन सकते हैं। यह दावा है केजीएमयू के चिकित्सकों की टीम का।
इस टीम ने राजधानी में सब्जी और कसाई की दुकान से लेकर रिक्शे और केमिस्ट तक से करीब 100 नोट और 50 सिक्के जमा किए और उनका लैब में अध्ययन किया। इसमें सामने आया कि इन सभी में किसी न किसी तरह का संक्रमण है।
इस अध्ययन का लक्ष्य लखनऊ के नागरिकों द्वारा उपयोग किए जा रहे नोट और सिक्कों में बैक्टीरिया व संक्रमण की स्थिति को जानना था।
अध्ययन में केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के चिकित्सकों व अध्ययनकर्ताओं सुनीता सिंह, मस्तान सिंह, मधुबन तिवारी, प्रतिभा कुमारी, शिवानी सक्सेना और पल्मोनरी मेडिसिन से संतोष कुमार शामिल थे। इनके अनुसार सामाजिक तौर पर साफ-सफाई की आदतों का असर मुद्रा पर भी पड़ता है। लेकिन इनके संक्रमित होने पर बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
इस तरह किया गया अध्ययन
1. सैंपलिंग : नोट और सिक्कों के सैंपल टीम ने लखनऊ के सभी प्रमुख बाजारों से लिए, जिनमें 15 लोकेशन शामिल थीं। इनमें 5 से लेकर 500 रुपये तक के 96 नोट और 1 से 5 रुपये तक के 48 सिक्के जमा किए गए। सैंपल लेने के लिए टीम के सदस्यों अपने हाथ बाकायदा स्टरलाइज किए।
2. परीक्षण : इन मुद्राओं का स्टराइल कंटेनर में न्यूट्रीयंट ब्रॉथ एनरिचमेंट किया गया। जो बढ़ते हुए सूक्ष्मजीवियों को उभारकर सामने लाता है। वहीं बैक्टीरिया, पैरासाइट, बसिलस, फंगस आदि की मौजूदगी का अध्ययन अलग-अलग मानकों पर किया गया।
3. क्या मिला : परीक्षण में सामने आया कि 100 प्रतिशत यानी सभी भारतीय मुद्राएं संक्रमित हैं। जो नोट जितना पुराना, उसमें उतना ही ज्यादा संक्रमण था। सिक्कों में नोटों की तुलना में संक्रमण कम पाया गया।
परिणाम कुछ ऐसे
अध्ययन के परिणाम में टीम का दावा है कि नोटों और सिक्कों में यह संक्रमण बैक्टीरिया, फंगस, परजीवियों सभी का है। अधिकतर में एक से अधिक किस्म का संक्रमण है।
क्या मिला, कितना घातक
प्रमुख बैक्टीरिया
1. बसिलस : यह 60.41 प्रतिशत नोटों में मिला तो 47.91 प्रतिशत सिक्कों में भी। वैसे तो यह प्राकृतिक तौर पर भी वातावरण में पाया जाता है और हमारे लिए कई किस्म के संक्रमण की वजह बनता है।
2. एस्चेरिचिया : ई-कोलाइ 41.66 प्रतिशत नोटों और 35.41 सिक्कों में मिला। यह भी कॉमन बैक्टीरिया है जो आंतों, पेट व यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। फूड पॉइजनिंग भी इसकी वजह से हो सकती है।
3. प्रोटियस प्रजातियां : 39 प्रतिशत नोटों और 42 प्रतिशत सिक्कों में मिली बैक्टीरिया की यह प्रजातियां हमारे भी शरीर की मूत्र विसर्जन प्रक्रिया में संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
4. लेबसिएला न्यूमोनिया : यह बैक्टीरिया 35 प्रतिशत नोटों में मौजूद था तो 13 प्रतिशत सिक्कों में। लेबसिएला हमारे फेफड़ों, रोग प्रतिरोधक क्षमता और यूरिनरी ट्रैक्ट आदि को प्रभावित करता है।
जहरीली और कैंसर फैलाने वाली फंगस की प्रजातियां
1. एस्परगिलस प्रजातियां : करीब 27 प्रतिशत नोटों और 37 प्रतिशत सिक्कों में एसपरगिलस प्रजातियां पाई गईं जो हमारे लिए जहरीली और कैंसरकारी मानी गई हैं। यह भोजन को भी संक्रमित करती हैं।
2. कैंडीडा एलबाइकन्स : यह फंगस करीब 14 प्रतिशत नोटों और 12 प्रतिशत सिक्कों में पाया गया। यह हमारे मुंह और त्वचा को संक्रमित करता है।
चेतावनी-संक्रमण के वाहक बन सकते हैं
अध्ययनकर्ताओं ने चेताया है कि मुद्राओं में मिला यह संक्रमण कई सूक्ष्मजीवियों का प्रसार माध्यम बन सकते हैं। इनकी वजह से कई बैक्टीरिया और फंगस के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं।
सबसे ज्यादा संक्रमण कसाई की दुकान से
अध्ययन के लिए सैंपल सब्जी वालों, कसाई की दुकान, रिक्शे वालों, बैंकों, अस्पतालों की जनरल व टीबी ओपीडी और केमिस्ट से लिए गए थे। इनमें कसाई की दुकान से लिए गए नोटों के सैंपल में सर्वाधिक संक्रमण पाया गया। वहीं केमिस्ट से लेकर ओपीडी से लिए गए नोटों में भी संक्रमण मिला जो बताता है कि वहां भी संक्रमण का खतरा मुद्रा के पहुंचने से बना हुआ है।
5 और 10 के नोट सबसे ज्यादा संक्रमित
अध्ययन में पाया गया कि 5 और 10 रुपये के नोटों में सबसे ज्यादा संक्रमण है। वहीं सिक्कों में 1 और 2 रुपये के सिक्के सर्वाधिक संक्रमित मिले। वजह स्पष्ट तौर पर यही थी कि ये सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले नोट हैं। दूसरी ओर 500 और 100 रुपये के नोट सबसे कम संक्रमित थे। वहीं कागज के नोटों में संक्रमण सिक्कों से कहीं अधिक था।
नोटों में मल की अशुद्धता
नोटों में मिला ई-कोलाइ, प्रोटियस, आदि के संक्रमण से अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि यह मल की वजह से उनमें आए हैं। वातावरण में साफ सफाई की कमी, खुले में शौच करने की वजह से यह हुआ है। तो वहीं व्यक्तिगत तौर पर कुछ लोगों द्वारा सफाई में बरती जाने वाली कमी से भी ऐसा होने की संभावना है।
कैसे बचें
- हाथ धोने की आदत का सख्ती से पालन करें।
- खासतौर से खाना खाने, आंख, नाक या मुंह को छूने से पहले और बाद हाथ धोएं।
- नोटों को बेहद छोटे बच्चों के हाथ में न दें, वे चीजों को मुंह में लेने के आदी होते हैं और आसानी से संक्रमित हो सकते हैं।
- नोटों को कभी भी खाने पीने की वस्तुओं के साथ न रखें।