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दूसरे राज्यों से बैकलॉग एंट्री बंद: जहां से जारी हुआ लाइसेंस, अब वहीं जा सकेंगे; जानें RTO के नए नियम

Fri, 03 Jul 2026 11:23 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

ड्राइविंग लाइसेंस में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब बैकलॉग प्रविष्टि केवल उसी कार्यालय से होगी, जहां से लाइसेंस जारी हुआ था। नई प्रणाली में पूर्व अनुमति, समय सीमा और डिजिटल सत्यापन अनिवार्य रहेगा। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और फर्जी लाइसेंस बनाने पर प्रभावी रोक लगेगी।

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indian_driver_showing_driving_licence_to_police - फोटो : AI
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विस्तार
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दूसरे राज्यों से ड्राइविंग लाइसेंसों (डीएल) की बैकलॉग एंट्री का खेल अब खत्म होगा। बैकलॉग एंट्री के जरिये दलाल डीएल में फर्जीवाड़ा कर रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने आदेश जारी किया है कि जिस जिले से डीएल बना है, बैकलॉग भी वहीं से जारी होगा। 

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इसे ऐसे समझें, अगर लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ से डीएल जारी हुआ है तो बैकलॉग भी इसी कार्यालय से हो सकेगी, किसी अन्य जिले या राज्य से नहीं। इसके लिए सारथी पोर्टल में बदलाव किया गया है। दरअसल, बीते अप्रैल में अमर उजाला ने दलालों द्वारा बैकलॉग एंट्री कर डीएल के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। बस्ती में दलालों ने 4500 फर्जी डीएल बनवाए थे। इसकी बैकलॉग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से की जा रही थी। 

इतना ही नहीं, दलाल गोरखपुर, मिर्जापुर, संतकबीरनगर आदि जिलों के डीएल की बैकलॉग एंट्री भी अरुणाचल प्रदेश से करवा रहे थे। दलालों के इस सिंडिकेट के खुलासे के लिए कई खबरें प्रकाशित की गईं। इसके बाद परिवहन विभाग ने मामले की गंभीरता को समझा।

 

 

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अमर उजाला ने उठाया था यह सवाल

जनवरी, 2013 से पहले डीएल मैनुअली बनते थे, रिकॉर्ड रजिस्टर में रखा जाता था। इसके बाद स्मार्ट कार्ड बनने लगे और रिकॉर्ड कंप्यूटर में रखा जाने लगा। वर्ष 2013 के बाद डीएल का रिकॉर्ड ऑनलाइन है।  इसके बावजूद दलालों ने अफसरों से मिलीभगत कर बैकलॉग एंट्री करवाई और पता परिवर्तन व नवीनीकरण करवाकर डीएल बनवा दिए। अमर उजाला ने सवाल उठाया कि बैकलॉग एंट्री की जरूरत क्यों पड़ी। 

इतना ही नहीं, सूत्र बताते हैं कि लर्नर लाइसेंस बनवाए बिना परमानेंट डीएल बनवाए गए। यही नहीं, भारी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए एक साल पुराना लाइसेंस अनिवार्य है। इस नियम को भी ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए। इन्हीं बातें को गंभीरता से लेते हुए अब नई व्यवस्था की गई है।

 

तय मियाद के बाद नहीं होगी बैकलॉग एंट्री

परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि सारथी व वाहन डाटाबेस में बैकलॉग एंट्री को लेकर पता चला कि कुछ राज्यों में बैकलॉग एंट्री अधिक हो रही है। डाटा की प्रामाणिकता व सुरक्षा बनाए रखने के लिए अब पोर्टल में किया गया है। इसके तहत सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। 

संबंधित राज्य के परिवहन सचिव या परिवहन आयुक्त की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। इतना ही नहीं, बैकलॉग एंट्री केवल उसी एआरटीओ कार्यालय से होगी, जहां से लाइसेंस बना है। तय मियाद के बाद एंट्री नहीं होगी। एनआईसी की ओर से सारथी पोर्टल पर ऐसी प्रविष्टियों के लिए स्पष्ट व स्थायी बैकलॉग मार्कर प्रदर्शित किया जाएगा, जो पूरा रिकॉर्ड दिखाएगा। इससे ऑडिट में भी आसानी होगी।

 

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पुराने वाहनों के रिकॉर्ड को तत्काल करें अपडेट

पुराने वाहनों के जो रिकॉर्ड राष्ट्रीय रजिस्टर में उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें बैकलॉग के माध्यम से तत्काल अपडेट किया जाए। वाहन स्क्रैपिंग के समय पोर्टल पर बैकलॉग एंट्री का प्रावधान है, जिसे वाहन स्वामी या स्क्रैप सेंटर ऑपरेटर की ओर से किया जा सकता है। इसे आरटीओ अनुमोदित करेगा।
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