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फिर से जिंदा होगा बाबरी मस्जिद विवाद?

Wed, 01 Apr 2015 03:59 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लख्ानऊ
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अयोध्या का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती व विहिप नेता अशोक सिंहल सहित 20 लोगों को नोटिस जारी किया हो लेकिन यह मामला सिर्फ न्यायालय की परिधि तक सिमटा रहेगा, इसकी संभावनाएं दूर-दूर तक नहीं है।
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इस प्रकरण के फिर ताजा होने से यह तय हो गया है कि सूबे में मंदिर-मस्जिद मुद्दे पर हथियारों को धार दी जाएगी। साथ ही सियासी बिसात पर गोटियां बिछाने की भी कोशिश होगी। इसकी झलक कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने की खबरों के साथ ही दिखने लगी।

नगर विकास व संसदीय कार्यमंत्री आजम ने घुमा फिराकर यह बताने की कोशिश की कि सीबीआई द्वारा इस मामले को खुलवाने और फिर से इन लोगों के खिलाफ विवेचना करने की मांग के पीछे बहुत बड़ी साजिश है।
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उन्होंने यह समझाने की कोशिश की है कि सीबीआई कहीं कुछ गड़बड़ कर सकती है। आजम के बयान और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हाजी महबूब के तर्कों को देखें तो सियासत की बात समझ में आ जाती है।

आजम खां ने तो शुरू कर दी तीखी टिप्पणियां

आजम को सीबीआई की नीयत में खोट दिख रहा है तो महबूब का भी यही तर्क है कि उन्होंने याचिका इसलिए की है क्योंकि केंद्र में भाजपा की सरकार होने से सीबीआई कुछ गड़बड़ कर सकती है।

प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य तथा अतीत में इस मुद्दे पर मुस्लिम पक्ष के प्रमुख पैरोकार रहे जफरयाब जीलानी का भी तर्क कुछ ऐसा ही है। वह कहते हैं, सीबीआई की याचिका पर मुसलमानों को भरोसा नहीं था। इसलिए हाजी महबूब को याचिका दायर करनी पड़ी।

उधर, विहिप के संरक्षक अशोक सिंहल भी सामने आ गए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले पर विरोधियों पर पलटवार किया। कहा, इसे अकारण बार-बार तूल दिया जा रहा है। लाख कोशिश कर ली जाए, इस मामले में किसी पर भी यह आरोप सिद्ध होने से रहा।

ढांचा किसी के इशारे पर नहीं बल्कि लोगों के स्वाभाविक आक्रोश के कारण ढहा। 20 वर्षों से इस मामले में हिंदुओं के खिलाफ षडयंत्र हो रहा है। सीबीआई की नीयत पर आशंका जताने वालों को भी उन्होंने निशाने पर लिया और कहा, इन लोगों को 20 वर्षों के दौरान केंद्रीय सत्ता द्वारा सीबीआई का दुरुपयोग नहीं दिखा। पर, नौ महीने पुरानी सरकार के दौरान सीबीआई के दुरुपयोग की आशंका सताने लगी।

भाजपा ने भी आजम को दिया पलटवार

भाजपा ने भी आजम व अन्य लोगों के बयान पर तीखी टिप्पणी की है। उसने कहा, हाजी महबूब की बात और आजम का बयान एक जैसा है। दिसंबर में मामले के एक प्रमुख पैरोकार हाशिम भी हाजी महबूब और आजम की जुगलबंदी का खुलासा कर चुके हैं। आजम का ताजा पत्र व हाजी महबूब की बात दोनों का मजमून एक ही है।

भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा, विहिप व भाजपा के नेता 2001 व 2010 में इस मामले में कोर्ट द्वारा बरी किए जा चुके हैं। इसमें भाजपा की क्या साजिश? अब फिर नोटिस दिया गया है तो जवाब दे दिया जाएगा।

भाजपा को न्यायालय की प्रक्रिया व फैसलों पर भरोसा है। जहां तक सीबीआई द्वारा आरोपपत्र में देरी की बात है तो इसमें भाजपा सरकार क्या करे? इसके लिए तो तत्कालीन यूपीए सरकार जिम्मेदार है। उसी से पूछना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका से फिर गरमाई सियासत

बाबरी मजिस्द विवाद के पक्षकार हाजी महबूब की ओर से ढांचा ढहाने के आरोपितों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका से अयोध्या का माहौल फिर गरमाया हुआ है। छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश के आरोप में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत 20 लोगों को नोटिस जारी होने से हचलच रही।

यहां आए विहिप के संरक्षक अशोक सिंहल ने कहा कि अब याचिका पर कुछ नहीं हो सकता, मामला टाइम बार हो चुका है। जबकि हाजी महबूब व मुद्दई हाशिम अंसारी ने कहा कि राजनाथ सिंह के गृहमंत्री रहते सीबीआई से न्याय की उम्मीद नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट जाना आवश्यक था।

अयोध्या टेढ़ी बाजार निवासी याचिकाकर्ता हाजी महबूब के मुताबिक सीबीआई ने पूरे मामले में लालकृष्ण आडवाणी को बचाने की कोशिश की। इस याचिका में 2010 में आए इलाहबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी को बाबरी मस्जिद तोड़ने के आरोप से बरी कर दिया गया था।

हाजी महमूद अहमद विवादित ढांचा में मूर्ति रख पूजा-पाठ किए जाने को लेकर हाशिम अंसारी के दायर मामले में पिछले 45 साल से एक पक्षकार भी हैं। बताते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में 21 आरोपियों को साजिश के आरोप से मुक्त कर दिया था।
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मुसलमानों की जगी आस

ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली कहते हैं कि मुसलमानों को देश के कानून पर पूरा भरोसा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुसलमानों को थोड़ी निराशा थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आरोपियों को नोटिस जारी करने से एक बार फिर मुसलमानों की आस जगी है। मुसलमानों को इंसाफ मिलने की पूरी उम्मीद है। नोटिस जारी किए जाने का हर मुसलमान स्वागत करता है।

वहीं आसिफी मस्जिद के इमाम कल्बे जव्वाद का कहना है कि
जुर्म करने वाले को सजा जरूर मिलती है। अयोध्या मामले में इंसाफ की सबको उम्मीद है। सेक्युलर सोच रखने वाला हर हिंदुस्तानी अयोध्या मामले से खुश नहीं है क्योंकि वह घटना मुसलमान ही नहीं, अन्य मजहब के लोगों को भी भारी नुकसान पहुंचा चुकी है। मुसलमानों को सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का स्वागत करना चाहिए।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अपर महाधिवक्ता जफरयाब जीलानी कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का यह नोटिस अयोध्या के हाजी महबूब के मुकदमे पर जारी हुआ है। सीबीआई के दाखिल मुकदमे पर मुसलमानों को भरोसा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से मुसलमानों की उम्मीद जगी है। आगे भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा है।

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि अयोध्या के दोषियों को हाईकोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जारी नोटिस से मुसलमानों को काफी राहत हुई है।

अयोध्या जैसे पवित्र स्थल पर अधार्मिक कार्य के आरोपियों को सजा जरूर मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को अयोध्या मामले में सख्त से सख्त फैसला सुनाना चाहिए ताकि देश की गंगा-जमुनी तहजीब को मिटाने का प्रयास करने वाले सामने आ सकें।
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