अल्पसंख्यक कल्याण व नगर विकास मंत्री आजम खां ने रविवार को चुटकी ली कि जस्टिस काटजू के गोमांस खाने वाले बयान पर मोदी भक्त और गोभक्त चुप्पी क्यों साध गए।
काटजू का बयान उन लोगों के लिए चुनौती ही नहीं बल्कि चुल्लू भर पानी में डूब मरने के लिए काफी है जो सांप्रदायिक भाषा बोलते हैं। गुलाबी क्रांति लाने वाले केंद्र में बैठे सत्ताधीशों को चाहिए कि कानून बनाकर पूर्वोत्तर राज्यों खासकर नगालैंड, मेघालय और मिजोरम सहित पूरे देश में गोवध पर पाबंदी लगा दें।
आजम ने तंज कसते हुए कहा, हर गोभक्त की यह जिम्मेदारी है कि वे देखें कि आज के बाद किसी भी पांच सितारा होटल के मेन्यू में बीफ की कीमत न लिखी हो। अगर लिखी जाती है तो ऐसे सभी होटलों की ईंट से ईंट उसी तरह बजा दी जाए जैसे बाबरी मस्जिद की बजाई गई थी।
कहा कि कमजोरों को मारने वाले और बेगुनाहों को सजा देने वालों में जस्टिस काटजू के बयान का विरोध करने की हिम्मत क्यों नहीं पैदा हो पाई।