मायावती के शासनकाल में राजधानी में अंबेडकर, कांशीराम व अन्य दलित महापुरुषों के नाम पर बनवाए स्मारकों को लेकर मंगलवार को विधानसभा में बसपा व सत्ता पक्ष में तीखी झड़प हुई।
संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने बसपा की खिंचाई करते हुए कहा कि स्मारकों को देखकर लगता है कि दौर-ए-बादशाहत आ गया है। मुगल बादशाहों के पैटर्न पर बेशकीमती इमारतें बनी हैं। खजाना खाली हो गया।
स्मारकों में उन गरीबों की मेहनत से कीमती ग्रेनाइट व पीतल लगा है, जिनके पास खाने को रोटी नहीं है। आजम ने स्मारकों को लेकर बसपा पर तंज कसा तो पार्टी के सदस्य आग बबूला हो गए व वेल में आकर हंगामा करने लगे। बाद में उन्होंने सदन से बहिर्गमन किया।
शून्य प्रहर में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने काम रोको प्रस्ताव के जरिये बसपा शासनकाल में बनवाए गए स्मारकों की उपेक्षा और उनका रख-रखाव न किए जाने का मामला उठाया। उनका कहना था कि अंबेडकर स्मारक में अंधेरा रहता है जिससे देखने आने वालों को असुविधा होती है।
ये राज्य सरकार की संपत्ति हैं न कि बसपा या किसी व्यक्ति विशेष की। राजनीतिक कुंठा के चलते राज्य सरकार अपनी ही संपत्ति की उपेक्षा कर रही है।