राज्यपाल राम नाईक व कैबिनेट मंत्री आजम खां
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किसी सरकारी फाइल पर क्या कोई मंत्री यह टिप्पणी कर सकता है- ‘मेरे सचिव होने की कुछ तो सजा मिलनी चाहिए’... पर अगर मंत्री आजम खां हो तो सब संभव है।
उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड में सदस्य के रूप में चहेते श्रीप्रकाश सिंह की नियुक्ति पर राज्यपाल राम नाईक के सवाल उठाने से खफा नगर विकास मंत्री मो. आजम खां ने बाकायदा लिखा-पढ़ी में ही फाइल पर यह टिप्पणी लिख डाली।
श्रीप्रकाश वर्तमान में नगर विकास विभाग के सचिव हैं। जब यह फाइल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास पहुंची तो उन्होंने राज्यपाल से बोर्ड के अध्यक्ष राकेश गर्ग को शनिवार को शपथ दिलाने का अनुरोध करते हुए फाइल भेज दी। साथ ही लिखा कि श्रीप्रकाश को शपथ दिलाने के बारे में बाद में सूचित किया जाएगा।
5 माह पहले श्रीप्रकाश ने शपथ लेने से किया था इन्कार
प्रदेश सरकार ने पूर्व में उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड में जिन चार सदस्यों की नियुक्ति की थी, उसमें श्रीप्रकाश भी शामिल थे। राजभवन में 14 जुलाई को जब इन्हें शपथ दिलाई गई तो वहां मौजूद रहते हुए भी श्रीप्रकाश ने ‘अपरिहार्य कारणों’ से शपथ लेने से इन्कार कर दिया।
राज्यपाल ने सीएम से जताई थी नाराजगी
राज्यपाल ने इस पर मुख्यमंत्री से आपत्ति भी दर्ज कराई। विशेषज्ञों के अनुसार किसी संवैधानिक संस्था में नियुक्ति के बाद पद ग्रहण न करना मुख्यमंत्री के साथ-साथ उस पद का भी अपमान है जिस पर नियुक्ति की गई है।
3 चिट्ठी लिखी, फिर नियुक्ति रद्द कर दी
तब राज्यपाल ने श्रीप्रकाश की शपथ को लेकर 29 जुलाई, 16 अगस्त व 6 सितंबर को सीएम को पत्र लिखा, पर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर राज्यपाल ने अक्तूबर के पहले सप्ताह में श्रीप्रकाश की नियुक्ति रद्द कर बोर्ड में सदस्य का पद रिक्त कर दिया। सीएम से किसी और को नियुक्त करने को कहा।
फिर वही नाम भेजा तो पूछा- वे शपथ लेंगे या नहीं
सरकार ने किसी और की नियुक्ति करने के बजाय 22 दिसंबर को राकेश गर्ग को अध्यक्ष और श्रीप्रकाश को सदस्य नियुक्त करने की मंजूरी देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेज दिया।
राज्यपाल ने गर्ग की नियुक्ति का अनुमोदन तो कर दिया, पर श्रीप्रकाश की फाइल इस टिप्पणी के साथ लौटा दी कि पहले स्पष्ट किया जाए कि वह शपथ लेंगे या नहीं? यही टिप्पणी आजम को नागवार गुजरी।