मुजफ्फरनगर दंगे के स्टिंग ऑपरेशन की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में जबर्दस्त हंगामा हुआ। भाजपा ने खुद के इस मामले से अलग रहने की बात कही तो समूचे विपक्ष व सत्ता पक्ष ने उस पर हमला बोल दिया।
संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने जेब से एक लिफाफा निकालते हुए कहा कि अगर एक भी सदस्य को इससे नाइत्तफाकी है तो वह इस्तीफा देते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है।
स्टिंग ऑपरेशन करने वाले चैनल टीवी टुडे नेटवर्क के पदाधिकारियों को शुक्रवार को विधानसभा में तलब किया गया था। अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सदन को चैनल की ओर से पत्र मिलने की जानकारी दी। प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने चैनल के ग्रुप हेड (लीगल) पुनीत जैन का पत्र पढ़कर सुनाया जिसमें 24 फरवरी को नोटिस मिलने की बात कही गई है।
...फिर भी नहीं माने आजम
इसमें जवाब देने के लिए पर्याप्त समय न मिलने, चैनल को जांच रिपोर्ट प्राप्त न होने तथा कुछ लोगों के चैनल छोड़कर चले जाने के कारण उनसे संपर्क करने के प्रयास का उल्लेख करते हुए पक्ष रखने के लिए थोड़ा और समय देने का आग्रह किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य, कांग्रेस के प्रदीप माथुर व रालोद के दलवीर सिंह ने जहां चैनल को एक अंतिम अवसर देने की बात कही, वहीं भाजपा के सुरेश खन्ना ने कहा कि भाजपा इस प्रक्रिया को खुद को पहले ही अलग कर चुकी है।
आजम ने कहा कि यह उनसे जुड़ा व्यक्तिगत मामला है। जिस दिन जांच का निर्णय हुआ था, उस दिन भाजपा सदन के साथ थी। यह एक सदस्य नहीं, बल्कि पूरे सदन के सम्मान का सवाल है। अगर एक भी सदस्य इससे सहमत नहीं है तो वह इस्तीफा देते हैं।
...और इसके बाद तो सब आ गए आजम के पक्ष में
इसके बाद तो नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस समेत संपूर्ण विपक्ष व सत्तापक्ष आजम के पक्ष में खड़ा हो गया। बसपा, कांग्रेस व रालोद ने भाजपा पर ही स्टिंग ऑपरेशन कराने का आरोप जड़ दिया।
भाजपा ने इसका विरोध किया, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। दोनों तरफ से जमकर नारेबाजी हुई।
हंगामे के बीच अध्यक्ष ने चैनल के पदाधिकारियों को 4 मार्च को सदन में हाजिर होकर पक्ष रखने का फैसला सुना दिया।
हंगामे के चलते अध्यक्ष को दो बार आधा-आधा घंटा के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।