सूबे में वाटर मीटर नहीं लगेगा। हालांकि इससे राहत की उम्मीद करना बेमानी होगा। राज्य सरकार वाटर टैक्स बढ़ाने पर विचार कर रही है। जल निगम के प्रबंध निदेशक शासन को पहले ही वाटर टैक्स का संशोधित प्रस्ताव भेज चुके हैं। जल्द ही इस पर निर्णय हो सकता है।
नगर विकास मंत्री मो. आजम खां ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर वाटर मीटर लगाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य की मंशा साफ करते हुए इसे अव्यावहारिक बताया है।
उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के सुधार कार्यों में शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए मीटर लगाने की अनिवार्यता जरूर की गई है, लेकिन मेरे विचार से प्रदेश में ऐसी स्थिति नहीं है कि मीटर लगाकर वाटर टैक्स लिया जाए। इसलिए पानी का मीटर लगाने के निर्णय पर फिर से विचार कर इसे स्थगित किया जाए।
क्या कहती हैं शर्तें
जेएनएनयूआरएम की शर्तों के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए घरों में पानी मीटर लगाना अनिवार्य है। इसके मुताबिक जितना पानी खर्च करेंगे उतना बिल भरना होगा। यानी उपभोक्ताओं को किलो लीटर के हिसाब से पानी का भुगतान करना पड़ेगा।