पिछले दिनों मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की तरफ से शुरू किए गए डैमेज कंट्रोल का ही असर है कि साढ़े तीन महीने से ज्यादा वक्त के बाद आजम खां बृहस्पतिवार को फिर से कैबिनेट की बैठक में पहुंच गए।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी से दूरी बनाने वाले आजम अब पार्टी मुखिया और मुख्यमंत्री से मिलने में भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। नगर विकास मंत्री आजम खां की छवि तुनुक मिजाज नेता की है।
गुस्सा आता है तो वे इसका इजहार करने से नहीं चूकते। कभी-कभी पार्टी के फैसलों के इतर भी लाइन ले लेते हैं। 14 मार्च को कैबिनेट की मीटिंग में निजी विश्वविद्यालय खोलने के मानक कम करने के प्रस्ताव पर वे उखड़ गए और बैठक से उठ खड़े हुए थे।
कैबिनेट का फैसला: अब इन्हें भी मिलेगा मकान
अगले दिन प्रदेश सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर बड़ा समारोह हुआ लेकिन आजम उसमें नहीं पहुंचे। हाल ही सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आगरा में हुई बैठक से भी उन्होंने दूरी बनाए रखी, जबकि वे सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं।
17 जून के बाद से 10 सितंबर तक हुई कैबिनेट की लगातार आठ बैठकों में वे शामिल नहीं हुए। गुरुवार को वे शिवपाल सिंह यादव के साथ कैबिनेट की बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे। खास बात यह भी रही कि दूसरे मंत्रियों की तरह वे भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पहले सचिवालय एनेक्सी पहुंच गए।
लखनऊ में रहने के बावजूद आजम कई बैठकों से अलग रहे। पिछले महीने कैबिनेट में सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों को 20 फीसदी कोटा देने का फैसला होना था।
आजम खां सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में बैठे रहे लेकिन बैठक में नहीं गए। सवाल करने पर सिर्फ इतना कहा, जरूरी बैठकें लगी थीं।
मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद मुलायम सिंह यादव के डैमेज कंट्रोल ने आजम को फिर से कैबिनेट बैठक में शामिल करा दिया। इतना ही नहीं, वे मुलायम सिंह के आवास पर मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए और सीएम अखिलेश यादव से भी मुलाकात की।
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