अयोध्या में जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव में आवश्यक बहुमत किसी के पास नहीं है, फिर भी सपा व भाजपा जैसे दल जिला पंचायत अध्यक्ष की क़ुर्सी पर निगाह बनाए हुए हैं। 40 सदस्य वाले इस सीट पर सबसे ज्यादा सीट समाजवादी पार्टी ने हासिल की है, उसके पास कुल 17 सीटें हैं। जबकि सत्तारूढ़ दल भाजपा को महज 8 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। वहीं कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला तो बसपा ने 4 सीटों पर विजय हासिल की है। शेष 11 सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी है। ऐसे में तय है कि अध्यक्ष पद की चाबी निर्दलीय व बसपा के पाले में होगा। वहीं, सपा ने ज्यादातर निर्दलीय को अपना समर्थक बताया है लेकिन इनमें से कुछ लोगों ने इनकार कर दिया है। वहीं, भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन उनके वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वह बहुमत की संख्या के करीब हैँ।
अयोध्या में जिला पंचायत सदस्य पदों का चुनाव खासा रोमांचक रहा। बड़े-बड़े दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा और सामने आए परिणामों में बहुमत का आंकड़ा किसी के पास नहीं है। कुल 40 सदस्यों में से जिला पंचायत अध्यक्ष चुने जाने के लिए 21 वोट चाहिए होंगे, जो किसी दल के पास नहीं। सपा को अध्यक्ष की सीट पाने के लिए चार वोट और हासिल करने होंगे। वहीं आठ सीट पर सिमटी भाजपा के लिए तो लड़ाई और भी कठिन होगी। कुल मिलाकर 11 निर्दलीय व 4 बसपा के जीते प्रत्याशी अध्यक्ष चुनने में अहम भूमिका निभाएंगे।
वहीं, चुनाव में बड़ नेताओं की हार पर गौर करें तो सत्तारूढ़ दल भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व श्रावस्ती जिले के प्रभारी अवधेश पांडेय बादल, गिरीश पांडेय डिप्पुल, कृष्ण कुमार पांडेय खुन्नु जैसे अध्यक्ष पद के दावेदार प्रत्याशी चुनाव में धराशाई हो चुके हैं। वहीं, अगर दिग्गज नेताओं की बात करें तो भाजपा के पांचों विधायक अपने-अपने क्षेत्र में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं दिला सकें हैं, सिर्फ अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त ने अपने विधानसभा के एकमात्र ब्लाक पूरा की तीन सीटों पर दो पर भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाकर पार्टी की लाज बचाई है। दूसरी ओर सपा के गोसाईगंज के पूर्व विधायक अभय सिंह ने अपने विधानसभा सीट के मया ब्लाक से चारों सीट पर सपा प्रत्याशी को जिताकर अपने वर्चस्व को कायम किया है।
17 सीटों वाली सपा की राह भी आसान नहीं
जिप चुनाव में सबसे ज्यादा सीट सपा के खाते में आई है। 17 सीट पाने के बाद भी सपा बहुमत के जादुई आंकड़े से चार कदम पीछे हैं। हालांकि सपा नेता अपने पाले में 25 सदस्यों के होने का दावा कर रहे हैं, जिसकी सूची भी उन्होंने जारी की थी। लेकिन कुछ जीते हुए निर्दलीय सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए सपा के साथ होने से इनकार किया है और सूची पर आपत्ति जताई है।
इसके बैकफुट पर हुई सपा ने सोशल मीडिया पर जारी इस सूची को डिलीट कर दिया है। ऐसे में तय है कि उसकी राह भी आसान नहीं है। वहीं, भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, यह तो तय है कि वह यह मौका आसानी से हाथ से जाने नहीं देगी। वर्तमान में उसके सामने सबसे बड़ी समस्या प्रत्याशी चयन को लेकर है, चुनाव जीते मसौधा के इंद्रभान सिंह व पूरा की रोली सिंह के नाम चर्चा में है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि ज्यादातर निर्दलीय व कुछ अन्य दलों के लोग उनके संपर्क में हैं।