अयोध्या भूमि विवाद में बाबरी मामले के पक्षकार रहे हाजी महबूब अयोध्या में टेढ़ीबाजार स्थित अपने आवास पर अकेले बैठे सोच की मुद्रा में थे। बोले अब क्या होना है, सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद खारिज कर दिया। इसका दुख तो है लेकिन फैसला मुसलमानों को स्वीकार है। मुसलमान शांति और सौहार्द चाहता है। अब सरकार को तय करना है कि राममंदिर निर्माण के साथ अयोध्या की तरक्की का स्वरूप क्या देंगे। बोले कि सुबह से वकीलों के फोन आए थे।
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स्थानीय मौलाना बादशाह, नदीम आदि आए थे। एसएसपी ने आकर सहयोग के लिए गले लगाया। महबूब बोले कि सुप्रीम कोर्ट पांच एकड़ भूमि पर मस्जिद देने की बात करता है लेकिन मुसलमानों को दान की भूमि पर मस्जिद बनाने पर दुआ कबूल नहीं होती है। अगर देना ही है तो अधिग्रहीत भूमि के आरा मशीन के हिस्से में दी जाए।
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महंत दिनेंद्र दास
- फोटो : अमर उजाला
ट्रस्ट में जाने के लिए अभी नहीं सोचा: महंत दिनेंद्र दास
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास के आवास पर दोपहर में दुर्गेश शुक्ला मिले, बोले महंत जी आराम कर रहे हैं। वो सुबह से किसी से मिल नहीं रहे हैं, स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। अपराहन चार बजे महंत दिनेंद्र दास से बात हुई तो बोले- तबीयत ठीक है। तीन चार दिन से ज्यादा जगने की वजह से दोपहर में सो गए थे। आज किसी से मुलाकात नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसका स्वागत है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी विवाद, बहस और आशंकाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब रामलला विराजमान का भव्य मंदिर बनेगा। सरकार के ट्रस्ट में शामिल होने को लेकर अभी नहीं सोचा है। भविष्य में देखा जाएगा।
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त्रिलोकीनाथ पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
मठ-मंदिरों में गए, डीएम भी मिलने आए
सखा रामलला के पक्षकार त्रिलोकीनाथ पांडेय रविवार को पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने कमरे से लेकर मठ-मंदिरों में व्यस्त रहे। सुबह तैयार होकर जैसे ही मठ-मंदिरों में कुछ साधु-संतों से मिलने के लिए निकलने वाले थे तभी डीएम का फोन आया। पांडेय ने बताया कि डीएम ने आकर उन्हें सहयोग देने के लिए बधाई दी।
इसके बाद वो मणिरामदास की छावनी जाकर महंत ऩृत्यगोपाल दास से मिले। फिर दिगंबर अखाड़ा में सुरेश दास, उदासीन मठ, श्रीरामबल्लभाकुंज आदि मंदिरों में गए। सब जगह लोगों ने उत्साह दिखाया, खूब मिठाईयां खाई और खिलाई गई। अब सौहार्द पूर्वक अयोध्या में भव्य मंदिर बनाने की ओर सबका ध्यान है।