शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गोरक्षा के लिए आवाज उठाने पर बुलडोजर की धमकी मिल रही है। कई समर्थकों को घरों में ही रोका गया है। यात्रा में भी प्रशासन ने सहयोग नहीं दिया। 4.64 लाख रुपये से अधिक शुल्क जमा करने के बावजूद अंतिम समय तक स्पष्ट अनुमति नहीं मिली। आगे पढ़ें पूरी खबर...
गोरक्षा के लिए निकली धर्मयुद्ध यात्रा में बाधा डालने और समर्थकों को परेशान करने का आरोप लगाते हुए ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कई कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए उनके घरों में ही नजरबंद रखा गया। कुछ समर्थकों को उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की धमकी तक दी जा रही है। यात्रा के दौरान भी कई स्थानों पर रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं मिलने के कारण समर्थकों को रात सड़क पर बितानी पड़ी।
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बृहस्पतिवार को लखनऊ के आशियाना स्थित क्लब में गाय को राज्य माता और राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन के असहयोग के कारण गो गर्जन अक्षौहिणी संकल्प कार्यक्रम अब डिजिटल माध्यम से आयोजित करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के लिए 4.64 लाख रुपये से अधिक शुल्क जमा करने के बावजूद अंतिम समय तक प्रशासन की ओर से स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देने और प्रशासन के रवैये पर आपत्ति जताने की बात कही।
403 विधानसभा क्षेत्रों से उठेगी गोरक्षा संकल्प की आवाज
शंकराचार्य ने बताया कि पहले 24 जुलाई शुक्रवार को आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति उपवन में दोपहर 12 बजे गो गर्जन अक्षौहिणी संकल्प का सार्वजनिक आयोजन प्रस्तावित था। अब यह कार्यक्रम डिजिटल माध्यम से होगा। प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में लोग एकत्र होकर गो रक्षा का संकल्प लेंगे। दोपहर 12 से दो बजे के बीच गो माता की रक्षा को लेकर संकल्प लेने के साथ आगे की रणनीति की घोषणा की जाएगी।
राम मंदिर चढ़ावे की चोरी पर भी उठाए सवाल
शंकराचार्य ने राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की घटना को भी सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि वहां केवल चोरी ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर अनियमितताएं भी हुई हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजकर पूछा गया है कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को किस आधार पर शंकराचार्य माना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने हिसाब से बोलने वाले सरकारी शंकराचार्य तैयार करना चाहती है।