हवा में उड़ने वाले मंत्री हैंडपंप से पानी की धार निकालने के लिए आसमान से जमीन पर पहुंच गए हैं।
मुजफ्फरनगर दंगों के बाद उन्हें जलस्तर गिरने का खतरा नजर आ रहा है। यही वजह है कि मेरठ और आगरा में बड़ा जमावड़ा कर समर्थकों का खोया विश्वास लौटाने की कोशिश हुई।
अब उनके युवराज दिल्ली से बाहर निकलकर जिले-जिले जाकर पदयात्रा कर रहे हैं। दूसरी तरफ उन्हीं लोगों से सियासी चुनौती मुंह खोले खड़ी है, जिनके साथ पिछला चुनाव लड़ा था।
एक और मजबूत दांव पर उनकी नजर है, यह है आरक्षण का दांव। सवाल उठ रहे हैं कि रैलियों और पदयात्रा के प्रयास क्या जलस्तर उठा पाएंगे ?
क्या हैंडपंप से पानी की धार बहेगी। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस आरक्षण का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, कहीं उसका दांव खाली न रह जाए।
ऐसा हुआ तो यूपीए में शामिल होकर स्थिति ‘न खुदा ही मिला न बिसाले सनम’ जैसी न हो जाए।