प्रदेश के शहरों में अब छोटे-छोटे टाउनशिप विकसित होंगे। इसमें मकान लेने वालों को सभी सुविधाएं मिलेंगी। मसलन टाउनशिप में बेहतर पानी की व्यवस्था के साथ बिजली आपूर्ति के उम्दा इंतजाम होंगे।
राज्य सरकार इसके लिए प्रदेश की इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति बदलने जा रही है। नई नीति में छह श्रेणियों में लाइसेंस देने का प्रावधान किया गया है।
डवलपर्स के पास यदि न्यूनतम 25 से 50 एकड़ जमीन है तो वह टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस भी दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2005 में तत्कालीन मुलायम सरकार इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति लाई थी।
इस नीति के तहत निजी क्षेत्र के विकासकर्ताओं को टाउनशिप विकसित करने के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू की गई। राज्य सरकार समय-समय पर इस नीति बदलाव करती है।
वर्ष 2005 के बाद 2011 और अब 2014 में इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में लाइसेंस देने के लिए प्रक्रिया में संशोधन किया जा रहा है।
नई नीति में कालोनियों में विद्युत तार अंडरग्राउंड करने, सीवरेज व्यवस्था बेहतर करने, 24 घंटे जलापूर्ति के इंतजाम करने और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने संशोधित नीति का प्रारूप तैयार करते हुए डवलपर्स और इससे जुड़े विभागों से राय मांगी है। उन्हें संशोधित नीति का प्रारूप भेजा गया है।
इसमें जहां पहले तीन श्रेणियों में लाइसेंस देने की व्यवस्था थी, वहीं छह श्रेणियों में लाइसेंस देने का प्रावधान किया गया है।
यही नहीं लाइसेंस शुल्क नगर निगम सीमा में प्रति एकड़ 60,000 और अन्य क्षेत्रों में 30,000 बढ़ाने का प्रस्ताव है। नगर निगम क्षेत्र में 1 लाख और अन्य क्षेत्रों में 50,000 रुपये प्रति एकड़ लाइसेंस शुल्क करने की योजना है।