यूपी में चिकित्सा शिक्षा का स्तर कैसा है, इसका एक उदाहरण लखनऊ की एक मेडिकल स्टूडेंट की कॉपियां जांचने के मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया है। मेडिकल स्टूडेंट की कॉपियां जांचे बगैर उसे अंदाज से अंक दे दिए गए।
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने परीक्षा कराने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया। हाईकोर्ट ने कहा- ये बेहद लापरवाही का मामला है। अदालत ने यूनिवर्सिटी पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए यह रकम छात्रा को देने के लिए कहा है। अब यूनिवर्सिटी ने एक महीने में कॉपियां फिर से जंचवाने का आश्वासन दिया है।
मेडिकल कॉलेज की छात्रा अलिशा खान ने याचिका में बताया कि 20 से 24 जून 2016 तक पीजी डिप्लोमा इन स्किन एंड वेनेरियल डिजीज के फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा दी थी। इसके तीन पेपर थे। नतीजे से वह उससे संतुष्ट नहीं थी और अक्तूबर 2016 में अपनी कॉपियां दिखवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के सूचना अधिकारी को आरटीआई दायर कर कॉपियां देखने की अनुमति उसे दे दी थी। आरटीआई के तहत उसे उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई गईं। इसमें सामने आया कि उसकी कॉपियां चेक ही नहीं की गईं, केवल मुख्य पृष्ठ पर अंदाज से अंक लिख दिए गए। कॉपियां देखने के बाद फिर से हाईकोर्ट की शरण ली।
याचिका में उसने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटो कॉपी भी लगाई, जिसमें सामने आया था कि कॉपियों में लिखे जवाबों को चेक ही नहीं किया गया। केवल मुख्य पृष्ठ पर अंक लिख दिए गए। इस पर हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक संतलाल पाल को तलब किया था। ताजा सुनवाई में वे मौजूद रहे।