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परदादा की कब्र खोजने भारत पहुंचे आस्ट्रेलिया के थॉमस और जैक

Wed, 09 Mar 2016 09:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सीतापुर

सार

  • गूगल सर्च की मदद से ढूंढी अपने परदादा की कब्र
  • परदादा की कब्र ढूंढते हुए ऑस्ट्रेलिया से यूपी पहुंचे
  • सीतापुर में मिली परदादा की 118 साल पुरानी कब्र
  • अपने पुरखों की कब्र देखकर थॉमस की आंखे डबडबा गई
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118 साल बाद ‌मिली परदादा की कब्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आस्ट्रेलिया से अपने परदादा की कब्र खोजने यहां पहुंचे थॉमस व जैक ज्यों ही यूरोपियन सिमेट्री में सम्मान स्मारक के करीब पहुंचे, उनके चेहरों पर कामयाबी हासिल करने सरीखा सुकून नजर आने लगा। 
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अपने परदादा की कब्र चूम पुष्पांजलि कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूर्वजों का सम्मान स्मारक देखने के बाद अनोखी ऊर्जा का संचार होने की बात कही। करीब 118 साल के अथक प्रयास के बाद पुरखों की कब्र देख आंखें डबडबा गईं। आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले थॉमस फेली ब्रिटिश आर्मी में कलर सार्जेंट के पद पर सीतापुर शहर में तैनात थे। तैनाती के दौरान 1897 में थॉमस फेली का हैजा से निधन हो गया। 
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92 और 65 साल के परपोते पहुंचे परदादा की कब्र पर

118 साल बाद ‌मिली परदादा की कब्र - फोटो : अमर उजाला
ब्रिटिश आर्मी द्वारा यूरोपियन सिमेट्री में उनका शव दफना दिया गया। इसकी सूचना उनके परिवारीजनों को आस्ट्रेलिया में दे दी गई। इसके बाद से उनके परिवारीजन यहां आकर थॉमस फेली की कब्र देखने व उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बेचैन थे। 

एक पीढ़ी गुजर जाने के बाद भी उनके वंशजों में चाहत बरकरार रही। इसी के चलते 92 वर्षीय उनके पोते जैक व 65 वर्षीय परपोते थॉमस ने यहां आने का निश्चय किया।
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गूगल सर्च से ढूंढी अपने परदादा की कब्र

परदादा की कब्र - फोटो : अमर उजाला
भारत आने के बाद गूगल पर सर्च कर ये लोग 4 मार्च को सीतापुर पहुंचे। यहां एक गेस्ट हाउस में रुके। गेस्ट हाउस के स्टॉफ से व कुछ लोगों से अपने दादा थॉमस फेली की कब्र के संबंध में जानकारी चाही।

इसके बाद गेस्ट हाउस संचालक ने इनको शहर के प्रमुख व्यवसायी दिनेश अग्रवाल से मिलाया। दिनेश की मदद से ये लोग यूरोपियन सिमेट्री पहुंचे, लेकिन कब्र की खोजना आसान नहीं थी। काफी जद्दोजहद के बाद उनका प्रयास रंग लाया। 
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