चैत्र नवरात्र का पहला व्रत बुधवार को रखा जाएगा, लेकिन इस बार बंद के कारण शहर के तमाम देवी मंदिरों में भक्तों की कतारें नहीं लगेगी। लखनऊ के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब नवरात्र में देवी भक्त मंदिरों में मां की पूजा-अर्चना नहीं कर सकेंगे। हालातों को देखते हुए इस बार भक्तों को घरों में ही कलश स्थापना कर देवी आराधना करने की सलाह दी है।
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- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषियों के मुताबिक कलश स्थापना सुबह से दोपहर तीन बजे तक की जा सकेगी, लेकिन अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:35 बजे से 12:28 बजे तक कलश स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा। मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि वह अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसा मौका देख रहे हैं जब नवरात्र के दिनों में देवी मंदिर बंद है और श्रद्धालु पूजा के लिए कतारों में नहीं लगेंगे। बड़ी काली जी मंदिर चौक के पुजारी पं. शक्ति दीन अवस्थी ने बताया कि वह पिछले कई दशकों से मंदिर से जुड़े हैं, लेकिन आज तक उन्होंने ना ऐसा देखा और ना ही बुजुर्गों से सुना कि नवरात्र के दौरान देवी मंदिर किसी महामारी के चलते बंद हो।
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navratri puja 2018
मंदिर प्रशासन को अगले आदेशों तक मंदिर बंद रखने को कहा गया है। सिर्फ मंदिर के पुजारी और सेवक ही माता की पूजा कर सकेंगे। ठाकुरगंज स्थित मां पूर्वी देवी बाघम्बरी सिद्ध पीठ के संरक्षक और देवी भक्त प्रमोद शुक्ला ने बताया लगभग तीन दशकों से मंदिर से जुड़ा हूं। प्राचीन देवी मंदिर में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुराने कैसरबाग के काली बाड़ी मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालु दर्शन करने नहीं जा सकेंगे। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गौतम भट्टाचार्य ने बताया मंदिर नवरात्र के दौरान बंद रहेगा। लोग दर्शन-पूजन नहीं कर सकेंगे।
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- फोटो : navratri puja 2018
नव संवत्सर पर होने वाले आयोजन स्थगित
नव संवत्सर महोत्सव समिति की ओर से नव संवत्सर पर होने वाले आयोजन स्थगित कर दिए गए हैं। सहसंयोजक संजय रस्तोगी ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते ऐसा किया गया है। वहीं, ऐशबाग रामलीला मैदान में होने वाला चैती महोत्सव भी नहीं होगा। समिति के अध्यक्ष हरीश चंद्र अग्रवाल ने बताया इसके स्थान पर सभागार में कलश स्थापना और सुंदरकांड पाठ ही होगा। भातखंडे के संगीत शिक्षक डॉ. कमलेश दुबे ने बताया हनुमान सेतु मंदिर में शाम की संगीत प्रस्तुति भी नहीं निरस्त कर दी गई है।
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इस बार नौ दिन के नवरात्र नवमी दो अप्रैल को
इस बार नवरात्र नौ दिन के रहेंगे। 25 को पहला नवरात्र होगा तथा 2 अप्रैल को नवमी मनाई जाएगी। अलीगंज के ज्योतिषी एसएस नागपाल ने बताया कि घट स्थापना के बाद नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत फलदायी होता है।
नवरात्र में देवी मां को नौ दिनों में अलग-अलग नैवेद्य चढ़ाने से अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
प्रथम : गो घृत : आरोग्य की प्राप्ति
द्वितीय : शक्कर : दीघार्यु की प्राप्ति
तृतीय : दूध : दुखों की निवृत्ति
चतुर्थ : मालपूआ : निर्णय शक्ति का विकास
पंचम : केले : बुद्धि का विकास
षष्ठी : मधु : आकर्षण व सुंदरता
सप्तमी : गुड़ : शोक मुक्ति और विपत्तियों से रक्षा
अष्टमी : नारियल : हर प्रकार की पीड़ा का शमन
नवमी : धान : लोक परलोक का सुख
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मंत्र जप करें होगा कल्याण
ज्योतिषी पं. राकेश पांडे ने बताया कि नवरात्र के साथ ही बुधवार से प्रमादी नामक नूतन संवत्सर 2077 शुरू होगा। इस वर्ष के राजा बुध व मंत्री चंद्रमा है। प्रमादी संवत्सर व वासंतिक नवरात्र का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कर्क लग्न उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में हो रहा है। व्यापारी वर्ग को लाभ होगा। देवताओं व धार्मिक कार्यों के प्रति लोगों का झुकाव होगा। रबी की फसल को भारी नुकसान होगा। नवरात्र एक महामारी काल में आरंभ हो रहा है अत: सम्पूर्ण मानव जाति को चाहिए की मां भगवती का ध्यान कर ‘जयंती मङ्गला काली भद्र काली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुतेष्’ मंत्र का मानसिक जप करते रहें। इससे संपूर्ण जनमानस का कल्याण होगा।
बाजार बंद, पूजा सामग्री खरीदने में भी दिक्कत
नवरात्र का पहला व्रत बुधवार को रखा जाएगा और शहर में चल रहे लॉकडाउन के चलते सोमवार को शहर के तमाम बाजारों की दुकानें बंद रहीं। इससे लोगों को पूजा सामग्री आदि खरीदने में परेशानी झेलनी पड़ी। शहर के जिन पुराने बाजारों में नवरात्र से हफ्ते भर पहले पूजा सामग्री की दुकानें जगमगा उठती थीं वे बाजार सोमवार को सूने पड़े रहे। टेढ़ी पुलिया पर सुबह के समय सब्जी मंडी के आसपास लगने वाली थोड़ी बहुत दुकानें खुली, जहां लोगों ने जरूरत का सामान खरीदा। मौका मिलने पर चौक और डालीगंज इलाकों में लोग परचून की दुकानों पर जरूरत का सामान लेने पहुंचे।