अगर आप भी पढ़-लिख कर अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और इसमें कहीं आर्थिक परेशानी सामने आ रही है तो घबराएं नहीं। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति के माध्यम से आप अपने सपनों के पंखों को उड़ान दे सकते हैं।
इसके लिए आपको अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा का फॉर्म फाउंडेशन की वेबसाइट पर जाकर भरना होगा। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां देना अनिवार्य होगा। लिखित परीक्षा ऑनलाइन नहीं बल्कि विभिन्न शहरों में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर होगी। फॉर्म भरते समय लिखित परीक्षा के लिए विद्यार्थी अपनी सुविधा अनुसार शहर का चयन कर सकेंगे। इसके लिए 52 शहरों का विकल्प फॉर्म में दिया गया है।
पिछली बार की तरह ही इस बार नवीं और दसवीं के प्रादेशिक बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए 30-30 हजार रुपये की 18 छात्रवृत्तियां और 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50-50 हजार रुपये की 18 छात्रवृत्तियां दी जाएंगी।
इस वर्ष की छात्रवृत्ति की परीक्षा में भाग लेने के लिए प्रादेशिक शिक्षा बोर्ड से नवीं से 12वीं कक्षा तक में पढ़ने वाले और पिछली वार्षिक परीक्षा में न्यूनतम 60 फीसदी अंक पाने वाले वे विद्यार्थी पात्र होंगे जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय डेढ़ लाख रुपये से कम हो। फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 31 अगस्त है।
अमर उजाला फाउंडेशन की वेबसाइट
अमर उजाला फाउंडेशन
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स्कॉलरशिप के सहारे अंकित कर रहा है पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
अंकित दुबे
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सपने बड़े हैं, पर जिम्मेदारी भी है। मम्मी-पापा का देहांत हो चुका है। अब बुजुर्ग बाबा के अलावा घर पर भाई-बहन हैं। इसलिए मेरा मकसद है कि पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकूं, जिससे कि जल्द से जल्द नौकरी पाकर अपने घर को सहारा दे सकूं। यह कहना है अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा संचालित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति पाने वाले अंकित दुबे का।
छात्रवृत्ति वाले अंकित दुबे ने प्रथम श्रेणी में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है। पिता राम कुमार दुबे की मौत उसके बचपन में ही हो गई थी। इसके बाद इंटरमीडिएट की परीक्षा के दौरान मां भी साथ छोड़ गई। अब अंकित आलमबाग के कैलाशपुरी में किराये का मकान लेकर बूढ़े बाबा और भाई-बहन के साथ रहता है। पढ़ाई के साथ अंकित मोबाइल शॉप पर भी काम करता है।
अंकित को यूपी बोर्ड की परीक्षा में 60.8 फीसदी नंबर मिले हैं। मूलत: संत रविदास नगर का रहने अंकित पिता की मृत्यु के बाद लखनऊ अपने फूफा पद्माकांत दुबे के यहां चला आया। प्रारंभिक पढ़ाई के बाद अब वह अलग रहकर पढ़ाई कर रहा है।