एटीएस के डी-रेडिक्लाइजेशन (घर वापसी) प्रोग्राम को कानूनी जामा पहनाने की तैयारी चल रही है। आंतक की राह पर चल रहे प्रदेश के युवाओं को इस प्रोग्राम के जरिए एटीएस मुख्य धारा में जोड़ने का काम कर रही है।
साथ ही, वह इससे संबंधित एक प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसे जल्द गृह विभाग को भेजा जाएगा। वहां से इस बाबत शासनादेश जारी होने के बाद गुमराह युवकों की बुनियादी जरूरतों जैसे- शिक्षा व रोजगार आदि दिलाने में अन्य सरकारी विभागों की मदद ली जा सकेगी।
दरअसल, इस प्रोग्राम को लेकर कोई शासनादेश नहीं होने से एटीएस को कभी-कभी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि कई बार युवक परिवार की कमजोर आर्थिक हालत और सरकारी मशीनरी के उदासीन रवैये के चलते गलत रास्ते पर चले जाते हैं।
ऐसे में उन युवकों को समाज कल्याण जैसे अन्य विभागों से मदद दिलाने की योजना है ताकि वे आसानी से समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सके और फिर से गलत रास्ते पर न जाएं।