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लोकभवन के गेट के नीचे दबकर मरी मासूम, डेढ़ लाख मुआवजे की घोषणा

Wed, 21 Jun 2017 09:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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लोकभवन का गेट - फोटो : amar ujala
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लखनऊ के हजरतगंज स्थित लोकभवन में बुधवार सुबह लोहे का गेट टूट कर गिरने से मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। मासूम वहीं खेल रही थी। तभी अचानक लोहे का गेट टूटकर  उसके ऊपर गिर पड़ा और सिर पर गहरी चोट लग गई।
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आसपास मजदूर काम कर रहे थे लेकिन किसी ने उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया। कुछ देर बाद मासूम ने तड़पकर मौके पर ही दम तोड़ दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने मासूम को सिविल अस्पताल भेजा। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में राजकीय निर्माण निगम ने डेढ़ लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। निगम के अनुसार, बच्ची के परिवारीजनों को मुआवजा पहुंचा दिया जाएगा।

मूलरूप से लखीमपुर के धौरहरा निवासी अनीता निर्माणाधीन लोकभवन में मजदूरी करती है। बुधवार को वह काम कर रही थी। उसकी सात साल की बेटी किरण वहीं खेल रही थी।
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सुबह करीब छह बजे लोक भवन में कुछ दिन पहले लगाया गया लोहे का गेट टूटकर अचानक गिर गया। गेट कीचपेट में आने से किरण गंभीर रूप से घायल हो गई। उसके सिर में गहरा जख्म हो गया लेकिन वहां काम करने वाले मजदूरों की इसकी जानकारी नहीं हुई।

आसपास के लोगों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया कि गेट के नीचे बच्ची दबी हुई है। काफी देर बाद एक मजदूर की नजर पड़ी तो उसने शोर मचाया। करीब 11 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को फोन पर सूचना दी। इसके बाद पहुंची पुलिस ने किरण को एम्बुलेंस से सिविल अस्पताल भेजा। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। एसएसआई डीडी सिंह ने बताया कि बच्ची की मां की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
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खून पर डाला बालू, छिपाने का करता रहा जतन

लोकभवन - फोटो : amar ujala
सीओ हजरतगंज अवनीश मिश्रा ने बताया कि लोकभवन में निर्माण काम करा रहे ठेकेदार प्रमोद यादव ने मामले को छिपाने का सारा जतन किया। मासूम के जख्मी होने के बाद जो खून घटना स्थल पर फैला था। उसे छिपाने केलिए बालू डाला गया। इसके अलावा आसपास काम कर रहे मजदूरों को वहां से दूर रखा गया। ताकि मामले की भनक किसी को न लगे।

गेट का निर्माण घटिया मैटेरियल से किया गया था। जिसके कारण वह गिरा। बताया जा रहा है कि ठेकेदार ने लगातार किरण केपरिवारीजनों को अपने निगरानी में रखा। उसे किसी से मिलने भी नहीं दिया। यहां तक कि पुलिस से भी उसने किरण की मां को बात नहीं करने दी। ठेकेदार ने पोस्टमार्टम हाउस पर भी अपनी जालसाजी नहीं छोड़ी।

उसने पोस्टमार्टम में शव सुपुर्दगी और वाहन बुकिंग में बच्ची के नाम की जगह उसकी मां का नाम दर्ज कराया। ताकि किसी को पता न चल सके। वहीं ठेकेदार का नाम दुक्खीराम दर्ज कराया।

बच्ची का शव देख पोस्टमार्टम हाउस पर लोग जैसे ही परिवारीजनों से पूछताछ करने लगते तो ठेकेदार, उसके कर्मचारी धमकी देने लगते कि मामला सचिवालय का है। ठेकेदार केकुछ कर्मचारी तो खुद को ही सचिवालय में कार्यरत बता रहे थे।
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