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यूपी में तबाही फैलाना चाहते थे IM के आका

Fri, 28 Mar 2014 03:28 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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गोरखपुर में बुधवार को गिरफ्तार किए गए पाकिस्तान के कराची निवासी अब्दुल वलीद उर्फ मुर्तजा उर्फ अफरोज और फहीम उर्फ मोहम्मद ओवैस उर्फ सलाम उर्फ उमर उर्फ शादाब खान खतरनाक मंसूबे से यूपी में दाखिल हुए थे।
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अफगानिस्तान के आतंकी ट्रेनिंग कैम्प में ट्रेनिंग ले चुके दोनों आतंकियों को इंडियन मुजाहिदीन के आका रियाज भटकल ने यहां भेजा था।

गोरखपुर से लिया एके-47

यही नहीं एके-47, चाइनीज पिस्टल व कारतूस भी रियाज के गुर्गे ने गोरखपुर में ही दोनों को मुहैया कराया था। इन दोनों के यहां पहुंचने से कुछ दिन पहले ही उनके कुछ साथी भी यहां डेरा डाल दिया था।

पूछताछ में सामने आया है कि वे एके-47 व पिस्टलों से अंधाधुंध फायरिंग मौत का खेल खेलकर दहशत फैलाते। आईबी ने मोदी या किसी अन्य राजनेता पर आतंकी हमले की आशंका का इनपुट दिया था।

एटीएस भी आतंकियों के इरादे से इन्कार नहीं कर रही। दोनों को एटीएस ने गुरुवार को अदालत में पेश किया। अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में लेने के बाद एटीएस की अर्जी पर दोनों को 12 दिन के रिमांड पर सौंप दिया।

यहां से ली थी ट्रेनिंग

आईजी कानून-व्यवस्था अमरेंद्र सेंगर के मुताबिक दोनों वर्ष 2010-2011 में तहरीक-ए-तालिबान (अफगानिस्तान) के बराउचा, हिलमंड, अफगानिस्तान स्थित ट्रेनिंग कैम्प ‘मास्कर अबू इमाम हनीफा’ में 40 दिन की ट्रेनिंग ली थी।

यहां उनकी अब्दुल्ला नाम के एक पाकिस्तानी से मुलाकात हुई। अब्दुल्ला ने ही दोनों को जेहाद के नाम पर उकसाया गया था।

उसी ने तौसीफ उर्फ दानियाल उर्फ रियाज भटकल व आफताब उर्फ मोहसिन चौधरी से कराची पासपोर्ट ऑफिस में इनकी मुलाकात कराई थी।

कई जिलों का लिया जायजा

अब्दुल्ला, तौसीफ चौधरी ने दोनों के पासपोर्ट बनवाए और ओमान एयरवेज की उड़ान से मस्कट होते हुए काठमांडू भेज दिया।

दोनों काठमांडू में रुक कर यूपी के विभिन्न जिलों में आ रहे थे और जायजा लेकर वापस लौट रहे थे।

वह लोग कहां-कहां गए, इसकी अभी एटीएस को जानकारी नहीं मिल सकी है।

पूछताछ के दौरान दोनों आतंकियों ने बताया कि उन्हें सारे निर्देश तौसीफ से मिलते से थे। काठमांडू आने से पहले उनकी तौसीफ से दो बार और मुलाकात हुई थी।
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गैर मुसल्ला को लेकर छिड़ी बहस

इन दोनों आतंकियों से काठमांडू में रियाज भटकल के एक साथी ने उनके पासपोर्ट ले लिए थे।

यहां इस व्यक्ति ने उन्हें फर्जी भारतीय नागरिकता के कागजात दिए थे, जिसे लेकर वे गोरखपुर पहुंचे थे।

पूछताछ में दोनों ने बताया कि उन्हें सिर्फ इतना ही पता था कि उन्हें गैर मुसल्ला लोगों पर हमला करना था। एटीएस अफसरों के अनुसार गैर मुसल्ला से मतलब निहत्थे फोर्स से है।

जबकि सूत्रों का कहना है कि यह निहत्थी भीड़ या समर्थकों पर हमला करते।

यह हमला किसी रैली में जुटने वाली भीड़ या राजनीतिक कार्यक्रम में एकत्र होने वालों पर होने की संभावना जताई जा रही है।
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