डालीगंज में एचडीएफसी बैंक के एटीएम बूथ पर रुपये भरने आई साइंटिफिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट सर्विसेज की कैश वैन वारदात के सात दिन पहले से बदमाशों के निशाने पर थी। राजधानी के विभिन्न इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की पुरानी फुटेज निकालने पर बदमाशों की तस्वीरें मिल गई हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वारदात 27 फरवरी को हुई थी। इससे पूर्व कैश वैन 24 फरवरी को एटीएम बूथ पर आई थी, लेकिन शाम होने के चलते बदमाशों ने वारदात अंजाम नहीं दी थी।
ट्रिपल मर्डर और 51 लाख रुपये लूटने वाले बदमाशों ने कैश वैन को डालीगंज के एटीएम बूथ पर ही लूटने की योजना बना रखी थी। कैश वैन के रूट के अध्ययन के बाद अफसर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि बदमाशों के लिए वारदात के लिए यह सबसे मुफीद और सुरक्षित जगह थी।
वैन के स्टाफ को कैश अशोकमार्ग पर जवाहर भवन के सामने स्थित एचडीएफसी बैंक से दिया गया था। यहां से कैश लेकर वैन हलवासिया स्थित एटीएम बूथ व दो अन्य बूथ की एटीएम मशीन में रुपये भरते हुए डालीगंज स्थित एटीएम बूथ पहुंची थी।
ज्यादा पाने की उम्मीद में थे लुटेरे
पुलिस सूत्रों का कहना है कि 24 फरवरी को कैश वैन हलवासिया से चौक और पुराने लखनऊ में लगे एटीएम बूथ पर रुपये भरते हुए शाम करीब पांच बजे डालीगंज पहुंची थी। लुटेरे उस वक्त भी वैन के पीछे लगे थे लेकिन वारदात नहीं की।
पुलिस का मानना है कि उस वक्त तक अधिकांश कैश एटीएम बूथों पर भरा जा चुका था और बदमाशों को ज्यादा रकम मिलने की उम्मीद नहीं थी इसलिए वह पीछे हट गए। एक वजह यह भी बताई जा रही है कि शाम के वक्त भीड़ ज्यादा होने के चलते इरादा बदल दिया होगा।
ऑपरेशन आल आउट को ठेंगा, मुंह बांधकर टहलते रहे बदमाशतीन हत्याएं कर एटीएम की कैश वैन लूटने वाले बदमाशों ने ऑपरेशन ऑल आउट और ऑपरेशन फ्लैश आउट को ठेंगा दिखा दिया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि बदमाश सात दिन से वैन के पीछे लगे थे। इस दौरान मुंह पर कपड़ा बांधकर लगातार हजरतगंज और आईटी चौराहा से डालीगंज पक्का पुल के बीच टहलते रहे और किसी भी जगह पर पुलिसकर्मियों ने नहीं टोका।
सूत्रों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों के मुंह पर कपड़ा लपेटकर बाइक से टहलने की फुटेज से आला अफसर खासे नाराज हैं। अफसरों ने पुलिसिंग और अभियानों पर सवाल उठाते हुए जिला पुलिस को कठघरे में खड़ा किया है।
ये था लुटेरों का ठिकाना
डालीगंज में एटीएम बूथ पर निजी कंपनी की कैश वैन के तीन कर्मचारियों की हत्या कर 51 लाख रुपये लूटने वाले बदमाश यूनिवर्सिटी के पास एक मकान में ठहरे थे। जांच में जुटी टीमों को इस संबंध में अहम जानकारी हाथ लगी है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के सूत्रों की मानें तो मकान में रहने वाले हरदोई के युवक ने बदमाशों को शरण दी थी।
वारदात के कुछ ही घंटे बाद संदिग्ध युवक गायब हो गया। इससे एसटीएफ का शक और गहरा गया है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें हरदोई और सीतापुर सहित अन्य जनपदों में भेजी गई है। एसटीएफ का दावा है कि संदिग्ध के हाथ लगते ही वारदात का खुलासा हो जाएगा।
ट्रिपल मर्डर और लूट करने वाले बदमाशों के रूट का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम ने डालीगंज से लखनऊ यूनिवर्सिटी के इर्द-गिर्द के इलाके का नक्शा बनाकर छानबीन शुरू की थी। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि वारदात के बाद बदमाश आईटी चौराहा से पहले बायीं तरफ यूनिवर्सिटी होते हुए मनकामेश्वर मंदिर जाने वाले रास्ते पर मुड़ गए थे।
यूनिवर्सिटी के ट्रांजिट हॉस्टल से दायीं तरफ गली में मुड़े बदमाशों की बाइक एक साइकिल सवार से टकराई। बाइक सहित सड़क पर गिरे बदमाशों ने गाली-गलौज करते हुए साइकिल सवार को धमकाया। इसके बाद बक्सा उठाकर चले गए थे। पूरी घटना एक महिला ने देखी थी, जिससे पुलिस को पता चला। हालांकि, इसके आगे बदमाशों की लोकेशन अब तक नहीं मिल सकी है।
एसटीएफ अफसरों का मानना है कि बदमाश इलाके से वाकिफ थे और यूनिवर्सिटी के हॉस्टल आसपास के मुहल्लों में शरण ले रखी होगी। इसी आशंका पर पुलिस व एसटीएफ की टीमों ने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल व मनकामेश्वर मंदिर जाने वाली गलियों में एक-एक मकान खंगाला। मकान मालिक और किरायेदारों की सूची बनवाई गई।
मकान में रहने वाले 35 साल की उम्र के आसपास वालों के नाम-पते लिए गए। पता चला है कि बादशाहबाग इलाके के एक मकान में रहने वाला युवक वारदात के बाद से गायब है। इस जानकारी पर एसटीएफ की टीम ने मकान की छानबीन की। वहां से मिले दस्तावेजों से लापता युवक के हरदोई निवासी होने का पता चला है। एसटीएफ अफसरों का मानना है कि तीन हत्याएं कर लूटपाट करने वाले बदमाश कौन थे और कहां के थे? संदिग्ध युवक के पकड़े जाते ही सब पता चल जाएगा।