चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने मेडिकल कॉलेजों की शैक्षिक गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए एक आईटी सेल का गठन किया गया है। ये सेल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के लेक्चर थिएटर की भी लाइव निगरानी और स्क्रीनिंग करती है। जिससे वहां के शिक्षक और उसके पढ़ाने की क्षमता, छात्रों की उपस्थिति भी एमसीआई से छुप नहीं पाती। गड़बड़ी करने वाले कॉलेज के संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के पास आईटी सेल का अलर्ट पहुंच जाता है।
इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विवि भी सभी मेडिकल कॉलेजों पर रखेगा, जिससे शैक्षिक गुणवत्ता को सुधारा जा सके। नर्सिंग, टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन जैसे विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता के सुधार के लिए भी चिकित्सा विवि प्रयास करेगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशन में मेडिकल कॉलेज की ग्रेडिंग भी की जा सकेगी।
गुणवत्ता सुधार सबसे बड़ी चुनौती
प्रदेश में 6210 मेडिकल छात्रों, 2016 डेंटल छात्रों 12544 नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्रों का प्रतिवर्ष पंजीकरण होता है। लगभग 2900 डिग्री और 29 हजार से पैरामेडिकल डिप्लोमा पाठ्यक्रम लगभग 34 विशेषज्ञताओं में चलाए जाते हैं। अधिकतर पैरामेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रम स्टेट मेडिकल फैकल्टी से नियंत्रित होते हैं। नए चिकित्सा विवि के लिए इन पर नियंत्रण और गुणवत्ता में सुधार बड़ी चुनौती होगा।
प्रशासकीय भवन का-क्षेत्रफल 27,540 वर्ग मीटर
ऑडिटोरियम 1500 क्षमता युक्त - क्षेत्रफल 12,600 वर्ग मीटर
पुस्तकालय- दो लाख किताबें होंगी, 100 कम्प्यूटर व ई-लाइब्रेरी भी
खेल का मैदान व क्लॉक टॉवर - क्षेत्रफल 740 वर्गमीटर
एम्फीथिएटर 1000 व्यक्तियों की क्षमता होगी। क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर
अतिथि गृह 16 कमरे, चार उच्च श्रेणी कमरे- क्षेत्रफल 2730 वर्गमीटर
ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट से होगा निर्माण, हरियाली का रखा जाएगा विशेष ध्यान
65 फीसदी ऊर्जा की बचत सौर ऊर्जा से होगी
अटल जी की याद में लघु संग्रहालय भी बनेगा
200 करोड़ रुपये खर्च होंगे भवन निर्माण में